मारुति सुजुकी अब केवल इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर ही नहीं, बल्कि हाइब्रिड कारों पर भी तेजी से फोकस कर रही है. कंपनी का मानना है कि भारत जैसे मार्केट में, जहां फ्यूल एफिशियंसी और बजट सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है, वहां किफायती हाइब्रिड कारें गेमचेंजर साबित हो सकती हैं. अब तक ग्रैंड विटारा और इनविक्टो जैसी प्रीमियम हाइब्रिड कारों तक ही सीमित रहने वाली यह टेक्नोलॉजी, आने वाले समय में फ्रोंक्स जैसी कॉम्पैक्ट और बजट फ्रेंडली SUVs में भी देखने को मिल सकती है.
लिथियम-आयन सेल और इलेक्ट्रोड का लोकल प्रोडक्शन
- हाइब्रिड कारों को महंगा बनाने का सबसे बड़ा कारण-उनके पुर्जे और बैटरी पैक हैं, लेकिन मारुति सुजुकी का मानना है कि लोकलाइजेशन (स्थानीय उत्पादन) के जरिए इसकी लागत को काफी कम किया जा सकता है. यही वजह है कि कंपनी ने भारत में लिथियम-आयन सेल और इलेक्ट्रोड प्रोडक्शन शुरू करने का ऐलान किया है. शुरुआत में यह सेल और इलेक्ट्रोड ग्रैंड विटारा हाइब्रिड के लिए इस्तेमाल होंगे, लेकिन बाद में इन्हें अन्य कारों जैसे फ्रोंक्स और आने वाली नई SUVs के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा. इससे मारुति को किफायती हाइब्रिड कारें पेश करने का मौका मिलेगा.
किफायती हाइब्रिड कारों का भविष्य
- मारुति सुजुकी पहले ही कह चुकी है कि आने वाले समय में वह हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को सिर्फ महंगी कारों तक सीमित नहीं रखेगी. इसका मतलब है कि भारतीय ग्राहकों को जल्द ही स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड टेक्नोलॉजी वाली किफायती SUVs देखने को मिल सकती हैं. फ्रोंक्स और 3 सितंबर, 2025 को लॉन्च होने वाली नई मारुति SUV इसके शुरुआती उदाहरण हो सकते हैं. बता दें कि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारें माइल्ड हाइब्रिड से अलग होती हैं. इनमें EV मोड भी होता है और माइलेज डीजल कारों से भी ज्यादा हो सकता है. यही वजह है कि मारुति इसे डीजल कारों का विकल्प मान रही है.
निवेश और भविष्य की योजनाएं
- मारुति सुजुकी ने पहले ही घोषणा की है कि वह 2031 तक भारत में 70,000 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली है. यह निवेश बैटरी, सेल, हाइब्रिड तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों के लोकलाइजेशन में इस्तेमाल होगा. इसका सीधा संकेत है कि कंपनी आने वाले वर्षों में न सिर्फ प्रीमियम बल्कि बजट फ्रेंडली हाइब्रिड कारें भी भारतीय सड़कों पर उतारने की तैयारी कर रही है.
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