अगर आप कम बजट में एक छोटी, किफायती और रोजाना शहर में इस्तेमाल होने वाली कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो Maruti Celerio एक खास ऑप्शन हो सकती है. इसका कॉम्पैक्ट साइज शहर की सड़कों और पार्किंग के लिए सुविधाजनक है. ऐसे में जो लोग फुल पेमेंट नहीं करना चाहते, वो इसे कार लोन के जरिए भी खरीद सकते हैं. आप Celerio के बेस वेरिएंट को 2 लाख रुपये की डाउन पेमेंट देकर भी फाइनेंस करा सकते हैं. 

Continues below advertisement

अगर आप Celerio के बेस वेरिएंट को खरीदते समय शुरुआत में 2 लाख रुपये डाउन पेमेंट करते हैं तो कार की बाकी कीमत को लोन के जरिए चुकाना होगा. यानी शुरुआत में आपकी जेब से 2 लाख रुपये जाएंगे और बची हुई रकम बैंक या फाइनेंस कंपनी से लोन के तौर पर ली जाएगी. इसके बाद हर महीने एक तय EMI का भुगतान करना होगा.

कितनी डाउन पेमेंट देनी होगी?

  • कार खरीदते समय केवल एक्स-शोरूम कीमत को देखकर बजट बनाना सही नहीं होता. RTO, इंश्योरेंस, टैक्स और दूसरे जरूरी चार्ज जुड़ने के बाद कार की ऑन-रोड कीमत बढ़ जाती है. इसलिए 2 लाख रुपये की डाउन पेमेंट के बाद लोन राशि आपकी कार की ऑन-रोड कीमत और फाइनेंस कंपनी की शर्तों पर निर्भर करेगी.
  • इस गाड़ी की ऑन-रोड कीमत 5.23 लाख रुपये के करीब है. अगर आप इसे खरीदने के लिए 2 लाख रुपये डाउन पेमेंट करते हैं तो 9.8 फीसदी ब्याज दर से आपको 4 सालों के लिए EMI 8,141 रुपये देनी होगी. अगर आप यह लोन 5 साल के लिए लेते हैं तो 9.8 फीसदी ब्याज दर से EMI की राशि 6,815 रुपये हो जाएगी.

Celerio का बेस वेरिएंट क्यों देखा जा सकता है?

  • Celerio का कॉम्पैक्ट आकार इसे शहर में रोजाना इस्तेमाल के लिए सुविधाजनक बनाता है. छोटी कार होने के चलते इसे ट्रैफिक में चलाना और तंग जगहों पर पार्क करना आसान हो सकता है. ऐसे लोग जिन्हें मुख्य रूप से ऑफिस, बाजार या रोजमर्रा के छोटे शहर वाले सफर के लिए कार चाहिए, वे इसके बेस वेरिएंट पर विचार कर सकते हैं.
  • बेस वेरिएंट चुनने का एक फायदा यह भी है कि शुरुआत में कार पर ज्यादा रकम खर्च नहीं करनी पड़ती. अगर आपकी प्राथमिकता जरूरी सुविधाओं के साथ कम बजट में कार खरीदना है तो बेस मॉडल से शुरुआत की जा सकती है.

Continues below advertisement

डाउन पेमेंट ज्यादा रखने का फायदा

  • अगर खरीदार के पास पर्याप्त बचत है, तो ज्यादा डाउन पेमेंट करने से लोन की रकम कम हो सकती है. उदाहरण के लिए, 2 लाख रुपये की डाउन पेमेंट के बाद जितनी रकम लोन में जाएगी, वह पूरी रकम पर ब्याज देना होगा. इसलिए डाउन पेमेंट बढ़ने पर लोन का बोझ कम हो सकता है.
  • लेकिन पूरी बचत डाउन पेमेंट में लगा देना भी जरूरी नहीं है. कार खरीदने के बाद इंश्योरेंस, सर्विस, फ्यूल और अचानक आने वाले खर्चों के लिए भी कुछ रकम बचाकर रखना जरूरी है. इसलिए डाउन पेमेंट का फैसला अपनी मासिक आय और उपलब्ध बचत को ध्यान में रखकर करना बेहतर रहता है.

लोन की अवधि का भी रखें ध्यान

  • अगर आपका बजट ऐसा है कि आप हर महीने ज्यादा EMI दे सकते हैं, तो छोटी अवधि का लोन कुल ब्याज को कम रखने में मदद कर सकता है. वहीं, अगर आप हर महीने कम रकम का भुगतान करना चाहते हैं, तो लंबी अवधि का विकल्प लिया जा सकता है. लेकिन लंबी अवधि में कुल ब्याज बढ़ सकता है.
  • इसलिए Celerio को फाइनेंस कराने से पहले अलग-अलग टेन्योर और ब्याज दरों पर EMI की तुलना करना उपयोगी रहेगा. बैंक और फाइनेंस कंपनियों की ब्याज दरें भी अलग-अलग हो सकती हैं.

खरीदने से पहले इन खर्चों को भी जोड़ें

  • कार का बजट बनाते समय केवल EMI को ही मासिक खर्च न मानें. इसके अलावा पेट्रोल, इंश्योरेंस, सर्विस और मेंटेनेंस जैसे खर्च भी होंगे. अगर कार का इस्तेमाल रोजाना ज्यादा होता है, तो फ्यूल पर होने वाला खर्च आपके कुल मासिक बजट को प्रभावित कर सकता है.

यह भी पढ़ें:- न DL न RC की जरूरत, बिना चालान के डर के इन स्कूटर को चला सकते हैं आप 


Car loan Information:

Calculate Car Loan EMI