अभी हमारे देश में अभी नवरात्री की धूम अभी हर तरफ देखने को मिल रही है. लेकिन इस बार नवरात्री में बंगाल में बहुत कुछ बदल गया है. क्योंकि दुर्गा पूजा में से पहले कई तरफ के बदलाव कोलकाता में देखने को मिल रहा है. जबकि इस बीच बड़ी खबर आ रही है कि त्योहारी सीजन के दौरान सड़कों और प्रमुख फ्लाईओवरों को लाल, पीले, नारंगी और गुलाबी जैसे भड़कीले रंगों से सजाने का फैसला लिया गया है.
जिसके चलते अब वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत बनता दिख रहा है. शहर को सुंदर और नया लुक देने के इरादे से बनाई गई इन रंग-बिरंगी सड़कों को रेनबो रोड्स नाम दिया गया था. लेकिन असल में यह सुंदरता ड्राइवरों के लिए किसी बड़े खतरे से कम साबित नहीं हो रही है. चलिए जानतें हैं कि कोलकाता की इन लाल-पीली रंगी सड़कों से लोगों को ड्राइविंग में कितनी और किस तरह की गंभीर दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं.
बढ़ रही हैं दिक्कतें
कोलकाता में रंग-बिरंगी सड़कों पर सबसे बड़ी और गंभीर समस्या गाड़ियों के फिसलने की सामने आ रही है. डामर की सामान्य काली सड़क पर टायरों को जो ग्रिप मिलता है. वह पेंट की परत चढ़ जाने से काफी हद तक खत्म हो जाता है.
जबकि हल्की सी बारिश होने पर या सुबह-सुबह ओस की नमी पड़ते ही यह रंगीन सतह कांच की तरह बेहद चिकनी हो जाती है. इसके कारण ब्रेक लगाने पर गाड़ियां तुरंत रुकने की बजाय फिसलने लगती हैं. जिससे खासकर बाइक और स्कूटर सवारों के गिरने का खतरा कई गुना बढ़ गया है.
यह भी पढ़ें: एक जैसी कार, 89 हजार रुपये का फर्क! Baleno-Glanza में कौन बेस्ट?
आंखों पर पड़ता है दबाव
ऐसा देखा जाता है कि आमतौर पर सड़कों का काला रंग सूरज की तेज धूप और गाड़ियों की हेडलाइट्स की रोशनी को सोखने का काम करता है. इसके अलावा सड़कों पर किया गया लाल, पीला या नारंगी जैसा चमकीला पेंट रोशनी को सोखने की जगह उसे वापस रिफ्लेक्ट करता है.
जबकि दिन के समय कड़क धूप में इस रंगीन सड़क से निकलने वाली चकाचौंध सीधे चालकों की आंखों में पड़ती है. वहीं रात के समय जब सामने से आने वाली गाड़ियों की हाई-बीम लाइट इस पेंट पर पड़ती है. तो ड्राइवरों की आंखों के आगे अचानक अंधेरा छा जाता है जिससे सामने का रास्ता देखना बेहद मुश्किल हो जाता है.
बढ़ता है लोगों में भ्रम
आपको बता दें कि सड़कों पर सफेद और पीले रंग की पट्टियां केवल सुंदरता के लिए नहीं होतीं. बल्कि वे लेन अनुशासन, स्टॉप लाइन और ट्रैफिक संकेतों को समझाने के लिए बनाई जाती हैं. जब पूरी सड़क को ही लाल, पीले या गुलाबी रंग से पूरी तरह पोत दिया जाता है तो उस पर बनी पुरानी लेन मार्किंग गायब हो जाती है.
ऐसे में वाहन चालकों को यह समझ ही नहीं आता कि वे अपनी सही लेन में चल रहे हैं या नहीं. रात के समय या मोड़ पर इस भ्रम के कारण गाड़ियों के आपस में टकराने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है.
यह भी पढ़ें: SUV से पिकअप तक, Jeep-Citroen लाएंगी 12 नए मॉडल
Car loan Information:
Calculate Car Loan EMI