Flex Fuel Car Insurance: भारत में बढ़ते प्रदुषण और कच्चे तेलों के आयत को घटाने के लिए सरकार ने एथेनॉल को इस्तेमाल में अब तेजी कर दी है और अब लगभग पुरे भारत में इसका उपयोग हो रहा है. जबकि अब एथेनॉल से चलने वाले फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. कई कंपनियों ने फ्लेक्स फ्यूल कार को लॉन्च भी कर दिया है.
फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों के लॉन्च होने के बाद अब जो सबसे बड़ा सवाल है कि, इस कार का इंश्योरेंस प्रीमियम पेट्रोल-डीजल गाड़ियों जैसा ही होगा या कुछ अलग रहने वाला है. जिसके चलते आज हम इस खबर में फेल्स फ्यूल गाड़ियों के इंश्योरेंस प्रीमियम पर ही चर्चा करेंगे.
थोड़ा महंगा हो सकता है इंश्योरेंस
आपको बता दें कि, फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों का इंजन साधारण गाड़ियों से थोड़ा अलग और एडवांस होता है. एथेनॉल में नमी सोखने का गुण होता है इसलिए इन गाड़ियों के फ्यूल टैंक, पाइपलाइन्स और सेंसर्स में जंग रोधी और महंगे मटेरियल्स का इस्तेमाल किया जाता है. जिसके चलते इंश्योरेंस कंपनियों का मानना है कि अगर भविष्य में किसी दुर्घटना में गाड़ी का इंजन या फ्यूल सिस्टम डैमेज होता है.
तो इसके स्पेयर पार्ट्स और रिपेयरिंग का खर्च नॉर्मल गाड़ियों से थोड़ा अधिक होगा. यही वजह है कि शुरुआत में इन गाड़ियों का ओन डैमेज यानी खुद के नुकसान वाला प्रीमियम नॉर्मल कारों के मुकाबले करीब 5% से 10% तक महंगा हो सकता है.
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मिल सकती है थर्ड पार्टी प्रीमियम में छूट
फ्लेक्स फ्यूल कार में खुद के नुकसान का बीमा थोड़ा महंगा हो सकता है. लेकिन सरकार पर्यावरण को बचाने वाले ग्रीन व्हीकल्स को बढ़ावा देने के लिए उनके थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम पर पहले से ही करीब 15% की विशेष छूट देती है.
जिसका मतलब फ्लेक्स फ्यूल वाहन भी पारंपरिक ईंधन के मुकाबले बेहद कम प्रदूषण फैलाते हैं. इसलिए पूरी संभावना है कि आने वाले समय में आईआरडीएआई इनके लिए भी सस्ते थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का नियम लागू कर दे. जिससे इससे कुल प्रीमियम का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा.
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