अभी हमारे देश में कई तरह के प्रोटेस्ट हो रहा है. जिसमें 10 अक्टूबर को हुए दिल्ली के जंतर-मंतर का प्रोटेस्ट सबसे ज्यादा हाईलाइट में चल रहा है. जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया. सरकार ने प्रदर्शन करने के लिए मना किया था और इसके लिए पहले से पुलिस ने पूरी तैयारी की थी.
आज हम इस खबर में बात करेंगे कि जंतर मंतर पर हुए प्रोटेस्ट में डिटेन किए गए लोगों को कौन से गाड़ियों से लेकर जाया गया. चलिए विस्तार से जानतें हैं कि जंतर-मंतर पर हुई इस कार्रवाई के दौरान किन गाड़ियों का प्रयोग किया गया और उन बसों की तकनीकी और अंदरूनी खासियतें क्या हैं.
डीटीसी बसों का हुआ इस्तेमाल
बता दें कि जंतर-मंतर पर अचानक जुटी भारी भीड़ और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी की बसों को इस्तेमाल किया था. सुरक्षा बलों और स्थानीय थानों की पुलिस ने मिलकर दर्जनों डीटीसी बसों को मौके पर तैनात किया ताकि एक ही समय में सैकड़ों लोगों को बैठाकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा सके.
सार्वजनिक परिवहन की इन बड़ी गाड़ियों का यूज़ करने का मुख्य कारण यह होता है कि पुलिस बल भीड़भाड़ वाले इलाके से कम से कम समय में अधिकतम लोगों को हटा सके. जबकि ये बसें कानून-व्यवस्था और यातायात को संभालने का एक सबसे बड़ा और भरोसेमंद जरिया साबित होती हैं.
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डीटीसी बसों की क्या है खासियत?
जानकारी दें दे कि डीटीसी बसों की सबसे बड़ी खासियत इनकी भारी यात्री वहन क्षमता होती है. जिसके चलते इस बस में कई लोग एक साथ आ सकते हैं. डीटीसी बसों के भीतर चौड़ी सीटें और खड़े होने के लिए काफी स्पेस होता है. जिससे पुलिस कर्मियों के लिए भीड़ को सुरक्षित तरीके से बैठाना आसान हो जाता है. सुरक्षा और निगरानी के लिहाज से भी इन बसों की खिड़कियों और दरवाजों पर मजबूत ग्रिल होते हैं ताकि कोई भी व्यक्ति चलती गाड़ी से बाहर न निकल सके.
वहीं इसके अलावा इन बसों में ड्राइवर और यात्रियों के बीच का हिस्सा काफी सुरक्षित होता है. डीटीसी बसों का मजबूत इंजन और चौड़ा व्हीलबेस हमेशा ही बिजी सड़कों पर भीड़ के बीच भी तेजी से आगे बढ़ने में मदद करता है.
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पुलिस वैन की खासियत
जंतर मंतर पर डीटीसी बसों के अलावा दिल्ली पुलिस के अपने आधिकारिक वाहनों और विशेष सुरक्षा वैनों को भी देखा गया है. बता दें कि पुलिस वाहनों की सबसे बड़ी खासियत इनकी बुलेट-प्रूफ बॉडी, मजबूत लोहे की ग्रिल और असामाजिक तत्वों से निपटने के लिए बनाए गए विशेष कंपार्टमेंट होते हैं.
वहीं प्रदर्शनकारियों के नेताओं या आक्रामक रुख अपनाने वाले लोगों को आम बसों के बजाय पुलिस वैनों में कड़ी सुरक्षा के बीच बैठाया जाता है. जबकि इन सभी गाड़ियों के सामने वाले हिस्से में सायरन और फ्लैश लाइटें लगी होती हैं जो भीड़भाड़ के दौरान रास्ता बनाने में मदद करती हैं.
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