Wireless Charging Bus: इलेक्ट्रिक गाड़ियों का भविष्य तेजी से बदल रहा है और अब दुनिया नई चार्जिंग टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है. अब तक लोग EV को चार्ज करने के लिए वायर और चार्जिंग स्टेशन का इस्तेमाल करते थे, लेकिन इजरायल में एक ऐसी तकनीक पर काम हो चुका है जहां बसें बिना तार के चार्ज हो रही हैं. यह सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा जरूर लगता है, लेकिन यह टेक्नोलॉजी अब असली दुनिया में इस्तेमाल हो रही है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल की सड़कों के नीचे खास वायरलेस चार्जिंग सिस्टम लगाया गया है, जिसकी मदद से इलेक्ट्रिक बसें चलते या रुकते समय चार्ज हो सकती हैं. इस तकनीक का मकसद EV चार्जिंग को आसान और तेज बनाना है. अगर यह टेक्नोलॉजी बड़े स्तर पर सफल होती है तो आने वाले समय में चार्जिंग स्टेशन और लंबा इंतजार काफी हद तक कम हो सकता है.
सड़क के नीचे छिपी है पूरी चार्जिंग टेक्नोलॉजी
इजरायल में इस्तेमाल हो रही इस टेक्नोलॉजी में सड़क के नीचे खास इलेक्ट्रिक कॉइल्स लगाए जाते हैं. जब इलेक्ट्रिक बस इनके ऊपर से गुजरती है या रुकती है, तब Magnetic Induction के जरिए बैटरी चार्ज होने लगती है. यानी यहां किसी तार को जोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती. यही वजह है कि इसे वायरलेस चार्जिंग कहा जा रहा है. इस सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बसों को लंबे समय तक चार्जिंग स्टेशन पर खड़ा नहीं रखना पड़ता.
खासकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए यह काफी उपयोगी माना जा रहा है क्योंकि इससे समय की बचत हो सकती है. इसके अलावा चार्जिंग प्रक्रिया ज्यादा आसान और ऑटोमैटिक बन जाती है. यही कारण है कि दुनिया के कई देश अब इस तरह की टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी दिखाने लगे हैं.
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क्या भविष्य में कारें भी ऐसे ही होंगी चार्ज?
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर वायरलेस EV चार्जिंग टेक्नोलॉजी सफल रहती है तो आने वाले समय में इसका इस्तेमाल कारों और दूसरे वाहनों में भी हो सकता है. हालांकि फिलहाल यह सिस्टम काफी महंगा माना जाता है क्योंकि सड़क के नीचे खास इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना पड़ता है. इसके अलावा बड़े स्तर पर इसे लागू करने में समय भी लग सकता है. लेकिन EV इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है और कंपनियां चार्जिंग को ज्यादा आसान बनाने पर लगातार काम कर रही हैं.
कई लोग मानते हैं कि भविष्य में पार्किंग एरिया, ट्रैफिक सिग्नल या हाईवे पर भी वायरलेस चार्जिंग सिस्टम देखने को मिल सकता है. अगर ऐसा हुआ तो EV इस्तेमाल करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा और लोगों की चार्जिंग से जुड़ी बड़ी चिंता भी काफी हद तक खत्म हो सकती है.
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