Isobutanol Fuel Blending in Diesel: पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग से E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद अब सरकार डीजल को लेकर भी एक बड़ा बदलाव करने जा रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाया जाएगा. इसका मकसद कच्चे तेल पर देश की निर्भरता को कम करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना है. यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत की कुल कच्चे तेल खपत में डीजल का योगदान करीब 40% है, यानी इस बदलाव का असर बहुत बड़े स्तर पर देखा जा सकता है.
क्या है Isobutanol Fuel और क्यों माना जा रहा बेहतर विकल्प?
अब सवाल यह उठता है कि आइसोब्यूटेनॉल आखिर है क्या? दरअसल, आइसोब्यूटेनॉल एक तरह का बायोफ्यूल है जो एथेनॉल से बनाया जाता है. साथ ही यह एथेनॉल के मुकाबले ज्यादा एनर्जी देता है और कम जलाने वाला होता है, जिससे यह डीजल में मिलाने के लिए बेहतर माना जाता है. सबसे राहत वाली बात यह है कि इस फ्यूल के इस्तेमाल के लिए गाड़ियों के इंजन या एग्जॉस्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, इसी वजह से इसे एक प्रैक्टिकल और जल्दी लागू होने वाला विकल्प माना जा रहा है. एक स्टडी के मुताबिक आइसोब्यूटेनॉल का सीटेन नंबर सिर्फ 15 से 20 के बीच होता है, जो डीजल के मुकाबले काफी कम है.
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Isobutanol मिलने से माइलेज पर क्या पड़ेगा असर?
अब बात आती है माइलेज पर असर की, तो इसको लेकर अभी फिलहाल कोई पक्का जवाब सामने नहीं आया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा इंजनों पर इसके प्रभाव और माइलेज पर असर को लेकर चिंताएं जरूर हैं, जिस पर एक्सपर्ट्स लगातार स्टडी कर रहे हैं. क्योंकि जब पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया गया था, तब कई वाहन मालिकों ने माइलेज और परफॉर्मेंस में कमी की शिकायत की थी. ऐसे में यह माना जा रहा है कि डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने पर भी माइलेज में कुछ हद तक फर्क पड़ सकता है, हालांकि इस बात कि पूरी टेस्टिंग अभी बाकी है.
इसके पीछे सरकार का मकसद सिर्फ माइलेज से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके पीछे पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा भी जुड़ी है. सरकार का मानना है कि डीजल में बायोफ्यूल मिलाने से विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी, साथ ही प्रदूषण कंट्रोल होगा और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
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