मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान से जुड़े वॉर का असर अब भारत के ऑटो सेक्टर में भी देखने को मिल रहा है. आलम यह है कि अब ऑटो डीलर्स गाड़ियों की सप्लाई और डिलीवरी पर इसके असर को लेकर चिंता जता रहे हैं. ऑटो डीलर्स के मुताबिक, आने वाले समय में कस्टमर्स को गाड़ियां मिलने में देरी हो सकती है, जिसके चलते ऑटो इंडस्ट्री को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
भारत के ऑटो डीलर्स का कहना है कि वॉर के चलते तेल, गैस, स्टील-एल्युमिनियम और कॉपर की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे गाड़ियों की प्रोडक्शन कॉस्ट भी बढ़ रही है. वहीं आधे से ज्यादा डीलर्स पहले ही सप्लाई में देरी का सामना कर चुके हैं और कुछ मामलों में तो 3 हफ्ते से ज्यादा की देरी हो रही है.
प्रोडक्शन और डिलीवरी दोनों हो सकते हैं प्रभावित
इसके अलावा, फ्यूल महंगा होने से खरीदारी पर भी इसका असर पड़ सकता है. कई लोग नई गाड़ी खरीदने का फैसला टाल सकते हैं. वहीं, कंपनियों के लिए भी पार्ट्स और कच्चा माल समय पर मिलना मुश्किल हो रहा है, जिससे प्रोडक्शन और डिलीवरी दोनों प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि अभी ऑटो सेक्टर की सेल्स अच्छी चल रही है, लेकिन अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो भविष्य में बाजार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और लोगों को गाड़ी के लिए ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है.
FADA के इस सर्वे से सामने आई ये बात
फेडरेशन ऑफ ऑटो डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FADA) ने हाल ही में एक सर्वे किया है, जिसमें सामने आया कि आधे से ज्यादा डीलर्स इस वॉर के चलते सप्लाई या डिस्ट्रीब्यूशन में अलग-अलग तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं. इनमें से 17 फीसदी से ज्यादा लोगों ने तीन हफ्ते से ज्यादा देरी की सूचना दी. वहीं फ्यूल की कीमतों को लेकर 36 फीसदी से ज्यादा डीलर्स ने बताया कि फ्यूल की बढ़ती कीमतें ग्राहकों पर असर डालती है, जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव कमर्शियल वाहन सेगमेंट में देखने को मिला है.
वहीं दूसरी ओर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऑटो सेक्टर की कमाई अब पूरी तरह वॉर और तेल सप्लाई के हालात पर निर्भर करेगी. अगर यह वॉर 3 से 6 महीने तक चलेगा, तो गाड़ियों की कीमतें और बढ़ेंगी, कंपनियों के मुनाफे घटेंगे और EV की तरफ लोगों का रुझान बढ़ जाएगा.
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