भारत में पहले लोग केवल गाड़ी का रंग और माइलेज देखकर गाड़ी खरीद लेते थे. लेकिन अब ग्राहकों की चाहत पूरी तरह से बदल गई है. जिसके चलते अब मार्केट में बेहद ही फीचर्स वाले गाड़ियों की डिमांड ज्यादा है. उन्हीं एक फीचर्स में से है सनरूफ. अब सभी लोग चाहते हैं कि, उनके गाड़ी में सनरूफ हो. लेकिन कंपनी फिटेड सनरूफ गाड़ी खरीदना आसान नहीं है. जिसके चलते कई लोग नार्मल और अपनी पुरानी गाड़ियों में आफ्टरमार्केट सनरूफ लगवाना पसंद कर रहे हैं.
अगर आप भी कुछ ऐसा करने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए ही है. आज हम इस खबर में आपको बताएंगे कि, बहार से सनरूफ लगवाने में कौन-कौन से नुकसान हैं. क्योंकि, यह काम देखने में जितना आसान लगता है इसके नतीजे उतने ही भयानक और खर्चीले हो सकते हैं. अगर आप भी अपनी कार में आफ्टरमार्केट सनरूफ लगवाने की सोच रहे हैं तो इसके गंभीर नुकसानों के बारे में पहले से जान लेना बहुत जरूरी है.
कार की मजबूती हो जाती है कम
आपको बता दें कि, किसी भी कार की छत सिर्फ धूप और बारिश से बचाने का काम नहीं करती बल्कि यह गाड़ी के ओवरऑल बॉडी स्ट्रक्चर को मजबूती देने वाला एक बहुत ही इम्पोर्टेन्ट पार्ट होती है. जब कोई मैकेनिक आफ्टरमार्केट सनरूफ लगाने के लिए कार की छत की धातु को काटता है तो गाड़ी का मूल ढांचा काफी कमजोर हो जाता है.
जबकि इससे कार के ए और बी-पिलर्स पर पड़ने वाला दबाव असंतुलित हो जाता है. जबकि अगर कभी कार का एक्सीडेंट होता है या गाड़ी पलट जाती है तो छत झटके को सहन नहीं कर पाएगी और तुरंत चपटी हो सकती है. फैक्ट्री-फिटेड सनरूफ वाली गाड़ियों में कंपनी छत के किनारों पर एक्स्ट्रा स्टील सपोर्ट और मजबूती देती है जो लोकल मैकेनिक कभी नहीं दे पाते.
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वॉटर लीकेज की हो सकती है समस्या
जानकारी दें दे कि, आफ्टरमार्केट सनरूफ लगवाने वाले ज्यादातर कार मालिकों को जिस समस्या का सबसे पहले सामना करना पड़ता है, वह है पानी का रिसाव. लोकल दुकानों पर सनरूफ की सीलिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रबर गैस्केट और सिलिकॉन सीलेंट बहुत ही घटिया क्वालिटी के होते हैं.
बरसात के मौसम में या कार वॉश कराते समय सनरूफ के किनारों से पानी रिसकर केबिन के अंदर आने लगता है. इससे कार की छत की अंदरूनी फैब्रिक खराब हो जाती है और बदबू आने लगती है. जबकि इसके अलावा धीरे-धीरे कार की पूरी मेटल शीट में जंग लग जाता है. एक बार जंग लगना शुरू हो जाए तो गाड़ी का पूरा ढांचा धीरे-धीरे गलने लगता है जिसे ठीक कराना नामुमकिन सा हो जाता है.
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इंश्योरेंस और वारंटी हो जाती है खत्म
बता दें कि,आफ्टरमार्केट सनरूफ फिट कराने का एक बहुत बड़ा नुकसान यह भी है कि इससे आपकी कार की आधिकारिक कंपनी वारंटी तुरंत खत्म हो जाती है. सनरूफ लगाने के दौरान वायरिंग से छेड़छाड़ की जाती है जिससे कार में शॉर्ट सर्किट या आग लगने का खतरा भी बना रहता है. अगर इलेक्ट्रिक फेलियर से कोई खराबी आती है तो कंपनी वारंटी क्लेम खारिज कर देगी.
वहीं, मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गाड़ी की मूल बनावट में ऐसा बदलाव करना गैर-कानूनी माना जाता है. बिना आरटीओ अप्रूवल के ऐसा मॉडिफिकेशन कराने पर इंश्योरेंस कंपनियां दुर्घटना के समय क्लेम देने से साफ मना कर सकती हैं.
रीसेल वैल्यू हो जाती है कम
आपको बता दें कि, लोकल सनरूफ में इस्तेमाल होने वाले ग्लास अक्सर यूवी-प्रोटेक्टेड या थर्मल इंसुलेटेड नहीं होते हैं. इसकी वजह से तीखी धूप में कार का केबिन बेहद गर्म हो जाता है जिससे एसी को बहुत ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है और गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है. वहीं, आप जब भी ऐसी मॉडिफाइड कार को सेकेंड-हैंड मार्केट में बेचने जाएंगे तो कोई भी समझदार खरीदार स्ट्रक्चरल डैमेज के डर से उसे खरीदना पसंद नहीं करेगा.
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