WLTP System: भारत में कार खरीदते समय सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवालों में माइलेज हमेशा सबसे ऊपर रहता है. ग्राहक कार का डिजाइन, फीचर्स और इंजन देखने से पहले यह जानना चाहते हैं कि गाड़ी कितने किलोमीटर प्रति लीटर चलेगी. लेकिन कई बार लोगों की शिकायत रहती है कि कंपनी द्वारा बताया गया माइलेज और असली रोड माइलेज काफी अलग होता है. इसी समस्या को खत्म करने के लिए अब सरकार नया WLTP सिस्टम लाने की तैयारी कर रही है. 

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माना जा रहा है कि इस नए टेस्टिंग सिस्टम के आने के बाद कार कंपनियों को ज्यादा सटीक माइलेज आंकड़े दिखाने होंगे. इससे ग्राहकों को कार खरीदते समय सही जानकारी मिल सकेगी और बाद में निराशा कम होगी. ऑटो इंडस्ट्री में इसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है क्योंकि इसका सीधा असर कंपनियों की मार्केटिंग और ग्राहकों के भरोसे दोनों पर पड़ सकता है.

क्या है WLTP और कैसे बदलेगा माइलेज टेस्ट?

WLTP यानी Worldwide Harmonised Light Vehicles Test Procedure एक नया  टेस्टिंग सिस्टम है जिसका इस्तेमाल कई देशों में पहले से किया जा रहा है. यह पुराने माइलेज टेस्ट सिस्टम की तुलना में ज्यादा वास्तविक ड्राइविंग परिस्थितियों को ध्यान में रखता है. इसमें सिर्फ लैब टेस्ट नहीं बल्कि स्पीड, ट्रैफिक, ब्रेकिंग और अलग-अलग रोड कंडीशन जैसे फैक्टर भी शामिल किए जाते हैं. 

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इसी वजह से WLTP के जरिए सामने आने वाला माइलेज आंकड़ा आम लोगों के असली अनुभव के ज्यादा करीब माना जाता है. अभी कई बार कंपनियों द्वारा बताए गए माइलेज और वास्तविक माइलेज में बड़ा अंतर देखने को मिलता है. लेकिन नए सिस्टम के बाद ग्राहकों को ज्यादा पारदर्शी जानकारी मिलने की उम्मीद है. इससे कार खरीदने वाले लोगों को बेहतर फैसला लेने में मदद मिल सकती है.

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ग्राहकों और कंपनियों पर क्या होगा असर?

अगर भारत में WLTP सिस्टम लागू होता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिलेगा. लोग कार खरीदने से पहले ज्यादा भरोसेमंद माइलेज आंकड़े देख पाएंगे और फ्यूल खर्च का बेहतर अंदाजा लगा सकेंगे. वहीं दूसरी तरफ ऑटो कंपनियों के लिए यह चुनौती भी बन सकता है क्योंकि अब बढ़ा-चढ़ाकर माइलेज दिखाना आसान नहीं रहेगा. कई कंपनियों को अपने इंजन और टेक्नोलॉजी पर ज्यादा काम करना पड़ सकता है ताकि वास्तविक माइलेज बेहतर हो सके. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे ऑटो इंडस्ट्री में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा. आने वाले समय में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों की टेस्टिंग में भी ऐसे आधुनिक सिस्टम की बड़ी भूमिका देखने को मिल सकती है.

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