भारत में लोग कार खरीदने के बाद उसमें मॉडिफिकेशन कराने बहुत पसंद करते हैं. ऐसा अक्सर देखा जाता है कि, लोग कार को शोरूम से बाहर लाते ही अपने जान पहचान मैकेनिक के पास पहुंच जाते हैं. इसके बाद अपनी कार में कई बदलाव करवाते हैं या कुछ नया आइटम लगवाते हैं. बता दें कि, कार हो या बाइक सबसे पहले कई लोग अपनी गाड़ी के हॉर्न को चेंज करवाते हैं. लेकिन यह कराना कानून अपराध है.

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अक्सर देखा जाता है कि, बहुत से कार मालिक अपनी गाड़ी को अलग और कूल लुक या ज्यादा तेज आवाज देने के चक्कर में बाजार से तरह-तरह के आफ्टरमार्केट और फैंसी हॉर्न लगवा लेते हैं. तो चलिए जानते हैं कि गाड़ी में किस तरह के हॉर्न लगवाने पर आपका भारी-भरकम चालान कट सकता है और इससे जुड़े कानून क्या कहते हैं.  

इन हॉर्न पर है सख्त पाबंदी

बता दें कि, अगर आपकी कार में प्रेशर हॉर्न या मल्टी-टोन हॉर्न लगा हुआ है तो तुरंत सावधान हो जाएं. सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के नियम 119 के तहत गाड़ियों में किसी भी तरह के प्रेशर हॉर्न, सायरन या हवा से बजने वाले तेज हॉर्न का इस्तेमाल पूरी तरह बैन हैं. वहीं, इसके अलावा ऐसे हॉर्न जो बजते समय अलग-अलग तरह की म्यूजिकल टोन या बार-बार बदलती हुई आवाजें निकालते हैं उन्हें भी गैर-कानूनी माना गया है.

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कानून के मुताबिक हॉर्न की आवाज केवल एक सीधी और सुरीली चेतावनी की तरह होनी चाहिए न कि किसी को डराने या चौंकाने वाली. इस लिए अगर आपके कार में नियम के मुताबिक हॉर्न नहीं है तो अभी सावधान हो जाएं.

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कितना कट सकता है चालान?

आपको जानकारी ले लिए बता दें कि, अवैध या प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल करने पर ट्रैफिक पुलिस मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 190(2) और धारा 39/192 के तहत कड़ी कार्रवाई करती है. नए ट्रैफिक नियमों के मुताबिक पहली बार प्रेशर हॉर्न या अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाला हॉर्न इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने पर 5,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है.

जबकि इसके अलावा पुलिस के पास यह अधिकार भी होता है कि वे आपकी गाड़ी में लगे गैर-कानूनी हॉर्न को तुरंत मौके पर ही निकालकर ज़ब्त कर लें. अगर आप दोबारा यही गलती करते हैं तो जुर्माने की राशि दोगुनी हो सकती है.

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लग सकती है पेनाल्टी

ट्रैफिक नियमों के मुताबिक सिर्फ गाड़ी में अवैध हॉर्न होना ही नहीं बल्कि सही हॉर्न का गलत जगह इस्तेमाल करना भी चालान का कारण बनता है. क्योंकि, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, अदालत और धार्मिक स्थलों के आसपास का इलाका कानूनन साइलेंस ज़ोन घोषित होता है.

जिसके चलते अगर आप इन जगहों के पास बेवजह हॉर्न बजाते हैं तो मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 194F के तहत 1,000 से 2,000 रुपये तक का अलग से चालान कट सकता है. वहीं, इसके अलावा रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच रिहायशी इलाकों में बिना किसी इमरजेंसी के तेज हॉर्न बजाना भी नियम उल्लंघन की श्रेणी में आता है.

इन हॉर्न का ही करें इस्तेमाल

बता दें कि, चालान और कानूनी कार्यवाही से बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि आप अपनी कार में हमेशा कंपनी से मिलने वाले स्टैंडर्ड हॉर्न का ही इस्तेमाल करें. अगर किसी वजह से हॉर्न खराब हो जाता है और बदलना पड़े  तो केवल भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा अप्रूव्ड और 93 से 112 डेसिबल की तय सीमा के भीतर आवाज देने वाले हॉर्न ही लगवाएं.

वहीं, बाजार में मिलने वाले पुलिस सायरन, एम्बुलेंस सायरन या किसी जानवर की आवाज निकालने वाले मॉडिफाइड हॉर्न से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें. समझदारी इसी में है कि अपनी कार को सुरक्षित रखें और नियमों का पालन करते हुए ड्राइविंग करें.

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