Hydrogen Fuel: भारत में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बाद लोगों ने तेजी से CNG गाड़ियों की तरफ रुख किया. लेकिन अब CNG भी पहले जितनी सस्ती नहीं रही. ऐसे में Hydrogen Fuel को लेकर चर्चा तेजी से बढ़ रही है. लोग जानना चाहते हैं कि क्या आने वाले समय में Hydrogen से गाड़ी चलाना CNG से भी सस्ता होगा. साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इसके लिए अलग किट लगानी पड़ेगी या नई गाड़ी खरीदनी होगी. 

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दुनिया भर की कई बड़ी ऑटो कंपनियां अब हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रही हैं. इसे भविष्य का क्लीन और एडवांस फ्यूल माना जा रहा है. भारत में भी धीरे-धीरे इस टेक्नोलॉजी को लेकर टेस्टिंग और रिसर्च बढ़ रही है. हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन ऑटो सेक्टर में इसे लेकर उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है.

हाइड्रोजन फ्यूल कैसे काम करता है?

हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी सामान्य पेट्रोल या CNG सिस्टम से काफी अलग होती है. इसमें Hydrogen गैस की मदद से बिजली बनाई जाती है और उसी बिजली से गाड़ी चलती है. इस प्रक्रिया में प्रदूषण बेहद कम होता है और गाड़ी से सिर्फ पानी की भाप निकलती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक मौजूदा पेट्रोल या CNG गाड़ियों में सीधे Hydrogen Fuel इस्तेमाल करना आसान नहीं होगा.

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इसके लिए अलग फ्यूल सेल सिस्टम और हाई प्रेशर Hydrogen टैंक की जरूरत पड़ती है. यानी सामान्य CNG किट की तरह छोटी कन्वर्जन किट लगाकर काम नहीं चलेगा. कई कंपनियां Hydrogen आधारित इंजन और Fuel Cell गाड़ियों पर काम कर रही हैं. आने वाले समय में खास Hydrogen किट या कन्वर्जन टेक्नोलॉजी भी आ सकती है, लेकिन फिलहाल यह तकनीक काफी महंगी और शुरुआती स्टेज में मानी जा रही है.

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क्या Hydrogen सच में रहेगा सस्ता?

Hydrogen Fuel को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी लागत को लेकर है. फिलहाल Hydrogen तैयार करना और उसे स्टोर करना काफी महंगा माना जाता है. यही वजह है कि अभी यह CNG से सस्ता विकल्प नहीं बन पाया है. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ेगी और प्रोडक्शन बढ़ेगा, इसकी कीमत कम हो सकती है. खासकर कमर्शियल वाहन और लंबी दूरी तय करने वाले ट्रक और बसों में इसका इस्तेमाल ज्यादा फायदेमंद माना जा रहा है.

भारत सरकार भी Green Hydrogen Mission पर तेजी से काम कर रही है ताकि भविष्य में इस फ्यूल को आम लोगों तक पहुंचाया जा सके. अगर Hydrogen स्टेशन बढ़े और टेक्नोलॉजी सस्ती हुई, तो आने वाले वर्षों में यह ऑटो सेक्टर का बड़ा गेम चेंजर बन सकता है. फिलहाल यह भविष्य की टेक्नोलॉजी जरूर लगती है, लेकिन इसकी संभावनाएं तेजी से मजबूत हो रही हैं.

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