आज पूरी दुनिया पेट्रोल और डीजल से होने वाले पॉल्यूशन को कम करने के नए तरीके खोज रही है. ऐसे समय में हाइड्रोजन से चलने वाली कारें लोगों के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन रही हैं. इन गाड़ियों की सबसे खास बात यह है कि इनके एग्जॉस्ट से धुआं नहीं निकलता, बल्कि केवल पानी निकलता है. यही वजह है कि इन्हें भविष्य की ग्रीन टेक्नोलॉजी माना जा रहा है. हाल ही में इस विषय पर कई रिपोर्ट्स और प्रयोग सामने आए हैं, जिनमें बताया गया है कि हाइड्रोजन कारें पर्यावरण को बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.

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हाइड्रोजन कारें सामान्य पेट्रोल या डीजल कारों से अलग तरीके से काम करती हैं. इनमें हाइड्रोजन गैस का इस्तेमाल किया जाता है. कार के अंदर एक फ्यूल सेल होता है, जो हाइड्रोजन और हवा में मौजूद ऑक्सीजन को मिलाकर बिजली बनाता है. इसी बिजली से कार की मोटर चलती है. इस पूरे प्रोसेस में कार्बन डाइऑक्साइड या जहरीला धुआं नहीं बनता, बल्कि केवल पानी की बूंदें निकलती हैं. इसलिए इन्हें जीरो एमिशन वाहन भी कहा जाता है.

कुछ ही मिनटों में भरा जा सकता है फ्यूल

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हाइड्रोजन कारें लंबी दूरी तय करने के लिए काफी जरूरी हो सकती हैं. इलेक्ट्रिक कारों को चार्ज होने में समय लगता है, जबकि हाइड्रोजन कार में कुछ ही मिनटों में फ्यूल भरा जा सकता है. इसके अलावा इनकी ड्राइविंग रेंज भी अधिक हो सकती है. यही कारण है कि कई बड़ी ऑटो कंपनियां इस तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं. हाल के दिनों में हाइड्रोजन से चलने वाली बसों और ट्रेनों की टेस्टिंग भी की गई है. दिल्ली में भी ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली बस सेवा शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं. 

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ग्रीन हाइड्रोजन मिशन पर दिया जा रहा जोर 

भारत सरकार भी ग्रीन हाइड्रोजन मिशन पर जोर दे रही है. इसका उद्देश्य स्वच्छ ईंधन तैयार करना और इम्पोर्टेड तेल पर निर्भरता कम करना है. अगर भविष्य में हाइड्रोजन का प्रोडक्शन सस्ता और आसान हो जाता है तो यह तकनीक आम लोगों तक भी पहुंच सकती है. इससे प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण को बड़ा फायदा मिलेगा.

अभी इस तकनीक के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. हाइड्रोजन को सुरक्षित तरीके से स्टोर करना और उसके लिए बड़े लेवल पर फ्यूल स्टेशन बनाना आसान नहीं है. कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल यह तकनीक महंगी है और इसे आम लोगों तक पहुंचने में समय लगेगा. सोशल मीडिया और ऑनलाइन चर्चाओं में भी लोग इसे भविष्य की तकनीक मानते हैं, लेकिन साथ ही इसकी लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़ी चुनौती बताते हैं.

ऐसे में कहा जा सकता है कि हाइड्रोजन कारें आने वाले समय में परिवहन क्षेत्र को पूरी तरह बदल सकती हैं. अगर तकनीक सस्ती और सुरक्षित बन जाती है, तो भविष्य में सड़क पर ऐसी गाड़ियां ज्यादा दिखाई दे सकती हैं जो धुआं नहीं बल्कि सिर्फ साफ पानी छोड़ेंगी. यह कदम पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है.

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