दिल्ली में सीएनजी ऑटो को लेकर हाल ही में बड़ा फैसला आया है. सरकार की नई इलेक्ट्रिक वाहन पॉलिसी 2.0 के तहत 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए सीएनजी ऑटो का रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएगा, सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो को ही नया परमिट मिलेगा. ऐसे में जिन लोगों के पास पुराना सीएनजी ऑटो है, उनके मन में सवाल है कि आखिर इसे बेचें कहां और कैसे. कई ऑटो ड्राइवर इस वजह से कन्फ्यूज रहते हैं कि आखिर अपनी पुरानी गाड़ी का करें क्या? लेकिन परेशान होने की बात नहीं है, ऑटो बेचने के कुछ आसान और लीगल तरीके हैं. आइए जानते हैं.

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सरकारी स्क्रैपिंग सेंटर पर बेचें

अगर आपका ऑटो तय उम्र पार कर चुका है, या फिटनेस टेस्ट पास नहीं कर पा रहा है, तो इसे सरकारी अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर बेच सकते हैं. इसके लिए परिवहन वाहन स्क्रैप पोर्टल पर जाकर नजदीकी रजिस्टर्ड सेंटर चुनें. इसमे फायदा यह है कि स्क्रैप कराने पर आपको एक सर्टिफिकेट मिलता है, जिसके जरिए नया कमर्शियल वाहन खरीदने पर मोटर व्हीकल टैक्स में करीब 15% तक की छूट मिल जाती है. नई इलेक्ट्रिक वाहन पॉलिसी में यह और फायदेमंद हो गया है, पुराना थ्री व्हीलर स्क्रैप कराकर नया इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने पर 25,000 रुपये का अतिरिक्त इंसेंटिव भी मिलेगा.

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एनओसी लेना न भूलें

अगर आपका ऑटो अभी भी ठीक कंडीशन में है. और आप उसे किसी दूसरे राज्य में बेचना चाहते हैं, जहां पुराने वाहनों पर पाबंदी नहीं है, तो यह भी हो सकता है. इसके लिए दिल्ली के लोकल क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से एनओसी लेनी होगी. इसके बाद दूसरे राज्य में गाड़ी का दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा.

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ऑनलाइन और लोकल डीलर भी मौजूद

ओएलएक्स जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सीधे गाहक ढूंढ सकते हैं. इसके अलावा दिल्ली एनसीआर में भजनपुरा, मयूर विहार या गाजियाबाद गुड़गांव बॉर्डर जैसे इलाकों में पुराने कमर्शियल वाहनों के लोकल डीलर भी मौजूद हैं, जो सीधे पुराना ऑटो खरीदते हैं. डीलर से बेचने का फायदा यह है कि पेमेंट और डाक्यूमेन्टैशन दोनों जल्दी निपट जाते हैं, हालांकि कीमत कई बार बाजार से थोड़ी कम मिल सकती है.

नए नियम से बढ़ सकती है बिक्री 

2027 से नया सीएनजी  ऑटो रजिस्टर नहीं हो सकेगा, इसलिए आने वाले महीनों में सेकंड हैंड सीएनजी ऑटो की डिमांड और सप्लाई दोनों में बदलाव देखने को मिल सकता है. जो लोग जल्दी बेचना चाहते हैं, उनके लिए अभी जनर्दस्त व्यवत है, क्योंकि नियम लागू होने के बाद बाजार का महोल बदल सकता है.

इन बातों का रखें ध्यान

बिना एनओसी  बिना ओनरशिप ट्रांसफर के गाड़ी बेचना कानूनी तौर पर रिस्की हो सकता है. अगर गाड़ी नए मालिक के पास जाकर किसी हादसे या ट्रैफिक उल्लंघन में फंसती है, तो पुराने रिकॉर्ड की वजह से नोटिस असली मालिक नाम पर ही आ सकता है. इसलिए पैसा हाथ में आते ही कागजी तुरंत पूरा करना चाहिए.

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