आजकल सेफ्टी को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है, खासकर बिजनेसमैन और हाई-प्रोफाइल लोगों के बीच सेफ्टी का डर ज्यादा है. यही वजह है कि नॉर्मल गाड़ियों को बुलेटप्रूफ या आर्मर्ड गाड़ियों में बदलने का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन सवाल यह है कि एक नॉर्मल कार को बुलेटप्रूफ बनाने में कितना खर्च आता है और इसमें क्या-क्या बदलाव किए जाते हैं? यहां हम आपको ये सारी बातें आसान तरीके से समझाने जा रहे है. 

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खास तकनीक के जरिए बनाया जाता है मजबूत

सबसे पहले आपके लिए समझना जरूरी है कि बुलेटप्रूफ कार असल में कोई अलग गाड़ी नहीं होती, बल्कि एक नॉर्मल कार को खास तकनीक के जरिए मजबूत बनाया जाता है ताकि वह गोलियों से बचा सके. इसके लिए कार में बुलेट-रेजिस्टेंट शीशे (ग्लास), दरवाजों और बॉडी में स्टील या खास मटेरियल की प्लेटिंग, मजबूत छत और रन-फ्लैट टायर लगाए जाते हैं. 

अगर खर्च की बात करें तो भारत में एक सामान्य कार को बुलेटप्रूफ बनाने का खर्च आमतौर पर 25 लाख रुपये तक हो सकता है. यह बेसिक लेवल की सुरक्षा होती है, जो पिस्टल या छोटे हथियारों से बचाने के लिए होती है. लेकिन अगर ज्यादा सुरक्षा चाहिए, जैसे AK-47 जैसी राइफल से बचाव तो खर्च काफी बढ़ जाता है. ऐसी हाई-लेवल आर्मर्ड कार की कीमत 45 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा तक जा सकती है.

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क्यों होता है खर्च इतना ज्यादा?

खर्च इतना ज्यादा क्यों होता है यह भी समझना जरूरी है. असल में कीमत कई चीजों पर निर्भर करती है, जैसे आप कितनी सुरक्षा चाहते हैं, कौन सी कार को मॉडिफाई कर रहे हैं उसमें कौन-कौन से एक्स्ट्रा फीचर्स जोड़ रहे हैं. उदाहरण के लिए मोटे बुलेटप्रूफ ग्लास, भारी स्टील प्लेटिंग, ब्लास्ट प्रोटेक्शन, फायर सिस्टम, और खास टायर जैसी चीजें कीमत को काफी बढ़ा देती हैं. 

एक और जरूरी बात यह है कि बुलेटप्रूफ और आर्मर्ड कार में फर्क होता है. बुलेटप्रूफ कार मुख्य रूप से गोलियों से बचाती है, जबकि आर्मर्ड कार ज्यादा एडवांस होती है और गोलियों के साथ-साथ बम या धमाकों से भी सुरक्षा दे सकती है. इसी वजह से आर्मर्ड गाड़ियां ज्यादा महंगी होती हैं. 

आसान शब्दों में समझें तो अगर आप सिर्फ बेसिक सुरक्षा चाहते हैं तो खर्च लाखों में रहेगा, लेकिन हाई सिक्योरिटी के लिए यह करोड़ों तक पहुंच सकता है. इसलिए कार को बुलेटप्रूफ बनाना एक महंगा और तकनीकी रूप से जटिल काम है, जिसे आम लोग आमतौर पर जरूरत के हिसाब से ही करवाते हैं. 

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