Avoid Dealer Fraud: नई कार खरीदते समय ज्यादातर लोग कीमत, डिस्काउंट और फीचर्स पर ध्यान देते हैं, लेकिन RTO रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस के नाम पर लगने वाले चार्ज को विस्तार से नहीं देखते. नई कार खरीदते समय डीलर अक्सर इंश्योरेंस और आरटीओ (RTO) के नाम पर ज्यादा पैसे वसूलते हैं. इससे बचने के लिए कोटेशन का प्राइस ब्रेकअप लिखित में लें, हैंडलिंग चार्ज (लॉजिस्टिक फीस) देने से साफ मना करें (यह गैर-कानूनी है), और खुद ऑनलाइन बीमा की दरें चेक करके तुलना करें. 

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RTO चार्ज की पूरी जानकारी लें 

RTO शुल्क राज्य और वाहन की कीमत के मुताबिक तय होता है. डीलर से RTO फीस का पूरा ब्रेकअप मांगें और देखें कि उसमें रजिस्ट्रेशन, नंबर प्लेट, स्मार्ट कार्ड और अन्य शुल्क अलग-अलग दर्ज हैं या नहीं. अगर किसी चार्ज का कारण स्पष्ट न हो तो उसकी जानकारी जरूर लें. जरूरत पड़ने पर संबंधित राज्य की RTO वेबसाइट पर भी फीस की कंफरमेशन की जा सकती है. वहीं, अक्सर शोरूम वाले कहते हैं कि उन्हीं से बीमा लेना जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं है. आप अपनी किसी भी पसंदीदा कंपनी से ऑनलाइन या ऑफलाइन इंश्योरेंस करवा सकते हैं. 

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आरटीओ और रजिस्ट्रेशन में घपला 

कई बार डीलर सरकारी RTO फीस से ₹2000 से 10000 तक अतिरिक्त वसूल लेते हैं. हमेशा अपने राज्य के परिवहन विभाग या Parivahan Sewa की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर सटीक रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस जरूर जांच करें. RTO के नाम पर दिए गए हर पैसे की पक्की सरकारी रसीद डीलर से मांगें कई बार डीलर अक्सर बीमा प्रीमियम पर अपना भारी कमीशन जोड़ते हैं. आप ऑनलाइन पॉलिसी बाजार या सीधे इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर जाकर प्रीमियम की खुद जानकारी हासिल करें.

Hidden Charges से रहें सावधान

अधिकांश शोरूम वाले बिल में ₹3000 से ₹8000 तक 'हैंडलिंग चार्ज' या 'लॉजिस्टिक चार्ज' जोड़ते हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट और कई राज्यों के परिवहन आयोग द्वारा अवैध माना जा चुका है. इसे बिल से तुरंत हटाने को कहें. इसके अलावा डिलीवरी से पहले डीलर से गाड़ी का VIN (चेसिस नंबर) और इंजन नंबर मांगें. पता करें कि गाड़ी का मैन्यूफैक्चरिंग ईयर वही है जो आपको बताया गया था.

इन बातों का रखें ध्यान

फाइनल इनवॉइस में एक्स-शोरूम कीमत, RTO शुल्क, इंश्योरेंस प्रीमियम, एक्सेसरी और अन्य चार्ज अलग-अलग दर्ज होने चाहिए. किसी भी अतिरिक्त शुल्क की जानकारी लें और बिना समझे भुगतान न करें. साथ ही इंश्योरेंस पॉलिसी, टैक्स रसीद और रजिस्ट्रेशन से जुड़े सभी दस्तावेज अपने पास सुरक्षित रखें, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी हो तो क्लेम कर सकें. 

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