Self Parking car Feature: आजकल मार्केट में आने वाली नई कारों में कई एडवांस फीचर्स दिए जा रहे हैं. इन्हीं में से एक सेल्फ पार्किंग फीचर भी है, जो ड्राइवर की सबसे मुश्किल मानी जाने वाली परेशानी यानी पार्किंग को काफी आसान बना देता है. खासकर भीड़भाड़ वाले शहरों में जहां छोटी सी जगह में कार पार्क करना मुश्किल बन जाता है, वहां यह तकनीक तेजी से पॉपुलर हो रही है. हालांकि कई लोगों के मन इसे लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर सेल्फ पार्किंग फीचर वाली कारें बिना किसी मदद के खुद पार्क कैसे हो जाती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सेल्फ पार्किंग फीचर वाली कारें असल में कैसे पार्क होती है और यह टेक्नोलॉजी कौन सी है. 

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क्या होती है सेल्फ पार्किंग कार?

सेल्फ पार्किंग कार ऐसी गाड़ी होती है जिसमें पार्किंग के दौरान कुछ या कई काम ऑटोमेटिक तरीके से हो जाते हैं. अलग-अलग कंपनियों के सिस्टम की क्षमता अलग-अलग हो सकती है. कुछ कारें केवल पार्किंग के लिए खाली जगह खोजती है, जबकि कुछ मॉडल स्टीयरिंग को पूरी तरह अपने कंट्रोल में लेकर कार को पार्किंग स्लॉट में पहुंचा देती है. कई आधुनिक कारों में सिस्टम एक्सीलेटर, ब्रेक और गियर शिफ्टिंग तक को कंट्रोल करने में सक्षम होता है. वहीं कुछ प्रीमियम मॉडल में ड्राइवर कार के बाहर खड़े होकर मोबाइल ऐप या की फॉब के जरिए भी वाहन को पार्क कर सकते हैं. 

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सेल्फ पार्किंग में कार को कैसे मिलती है खाली जगह? 

सेल्फ पार्किंग सिस्टम का सबसे अहम हिस्सा उसके सेंसर और कैमरे होते हैं. कार के आगे, पीछे और साइड में लगे सेंसर आसपास मौजूद वाहनों, दीवारों, खंभों और दूसरी दिक्कतों की दूरी मापते रहते हैं. जब कार किसी सड़क या पार्किंग एरिया से गुजरती है तो सिस्टम आसपास मौजूद खाली जगहों का आकलन करता है. सेंसर यह जानते हैं कि उपलब्ध जगह वाहन की लंबाई और चौड़ाई के हिसाब से पर्याप्त है या नहीं. यदि सिस्टम को सही जगह मिलती है तो कार की स्क्रीन पर ड्राइवर को सूचना मिल जाती है. कई कारों में ड्राइवर को इंडिकेटर देकर यह बताना होता है कि उसे सड़क के किस तरफ पार्किंग स्पेस तलाशना है. इसके बाद सिस्टम उसी दिशा में खाली जगहों को स्कैन करता है. 

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सेल्फ पार्किंग के दौरान क्या होता है? 

जैसे ही सही पार्किंग स्पेस मिल जाता है. कार का ऑन बोर्ड कंप्यूटर एक्टिव हो जाता है. इसके बाद सेंसर और कैमराें से मिलने वाले डेटा के आधार पर सिस्टम पार्किंग का पूरा रास्ता तय करता है. पार्किंग के दौरान कंप्यूटर यह है गणना करता है कि स्टीयरिंग को किस कोण पर घूमना है, कितनी दूरी तक पीछे जाना है और कब वाहन को सीधा करना है. कई कारो में ड्राइवर को केवल ब्रेक और एक्सीलेटर कंट्रोल करना पड़ता है, जबकि स्टीयरिंग पूरी तरह सिस्टम संभाल लेता है. ज्यादा एडवांस मॉडल में कार खुद आगे पीछे होती है, ब्रेक लगती है और जरूरत पड़ने पर दिशा बदलकर पार्किंग प्रोसेस पूरी करती है. 

सेंसर और कैमरे कैसे करते हैं काम? 

सेफ पार्किंग करने में आमतौर पर अल्ट्रासोनिक सेंसर, रडार और कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है. यह सेंसर सिग्नल भेजते हैं जो आसपास की वस्तुओं से टकराकर वापस लौटते हैं. सिस्टम इन सिग्नलों के लौटने में लगे समय के आधार पर वस्तुओं की दूरी पता लगता है. कुछ कारों में 360 डिग्री कैमरा सिस्टम भी दिया जाता है, जिससे वाहन को अपने आसपास का लगभग पूरा नजारा मिल जाता है. यही वजह है कि कार बहुत कम जगह में भी सुरक्षित तरीके से पार्क हो जाती हैं.

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