पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने कार मालिकों का बजट बिगाड़ दिया है. यही वजह है कि अब लोग अपनी पेट्रोल कार को CNG में बदलवाने के बारे में सोच रहे हैं. CNG कार चलाने का खर्च पेट्रोल के मुकाबले काफी कम होता है और माइलेज भी बेहतर मिलता है. अगर आपके पास पेट्रोल कार है और आप उसे CNG में कन्वर्ट करवाना चाहते हैं तो इसके लिए कुछ जरूरी नियम, खर्च और जरूरी बातों को जानना बहुत जरूरी है.

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सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हर पेट्रोल कार में CNG किट नहीं लगाई जा सकती. सरकार के नियमों के मुताबिक, केवल उन्हीं गाड़ियों में CNG किट लग सकती है जिनका वजन 3.5 टन से कम हो. आमतौर पर छोटी हैचबैक, सेडान और कई SUV में CNG किट आसानी से लगाई जा सकती है. हालांकि बहुत पुरानी कारों या खराब इंजन वाली गाड़ियों में CNG लगवाना सही नहीं माना जाता.इसलिए किट लगवाने से पहले कार की हालत और इंजन की जांच करानी जरूरी होती है.

कितना आएगा खर्चा?

अगर खर्च की बात करें तो पेट्रोल कार में CNG किट लगवाने का खर्च आमतौर पर 35 हजार रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक हो सकता है.यह कीमत कार के मॉडल, इंजन और इस्तेमाल होने वाली किट की क्वालिटी पर निर्भर करती है.अच्छी और ब्रांडेड CNG किट थोड़ी महंगी होती है, लेकिन लंबे समय में ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद मानी जाती है. कई लोग सस्ती किट लगवाने की गलती कर देते हैं, जिससे बाद में इंजन और सुरक्षा से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं.

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CNG किट हमेशा सरकार से प्रमाणित और अधिकृत डीलर से ही लगवानी चाहिए. किट लगाने के बाद उसका बिल और सर्टिफिकेट लेना भी जरूरी होता है. इसके बाद गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी RC में भी बदलाव करवाना पड़ता है ताकि उसमें फ्यूल टाइप पेट्रोल से बदलकर CNG दर्ज हो सके. इसके साथ ही इंश्योरेंस कंपनी को भी इसकी जानकारी देना जरूरी होता है. अगर ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य में इंश्योरेंस क्लेम में परेशानी हो सकती है.

कितना है CNG कार का खर्च?

CNG में कार बदलने का सबसे बड़ा फायदा कम खर्च है. पेट्रोल के मुकाबले CNG काफी सस्ती पड़ती है और कार का रनिंग कॉस्ट काफी कम हो जाता है. कई लोग बताते हैं कि CNG कार का खर्च लगभग 2 से 3 रुपये प्रति किलोमीटर तक आ जाता है, जो पेट्रोल से काफी कम है. इसके अलावा CNG से प्रदूषण भी कम होता है, इसलिए यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प माना जाता है.

इसके कुछ नुकसान भी हैं. CNG सिलेंडर लगने से कार के बूट स्पेस यानी सामान रखने की जगह कम हो जाती है.इसके अलावा कुछ कारों में पिकअप और परफॉर्मेंस थोड़ी कम महसूस हो सकती है.अगर सही तरीके से किट नहीं लगाई गई तो इंजन और ECU से जुड़ी दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं.कई कंपनियां आफ्टरमार्केट CNG किट लगवाने पर कार की वारंटी भी खत्म कर देती हैं.यही वजह है कि नई कारों में लोग अक्सर फैक्ट्री-फिटेड CNG मॉडल लेना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं.

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