Honda Loss: दुनियाभर की ऑटो कंपनियां पिछले कुछ सालों से इलेक्ट्रिक वाहनों पर बड़ा दांव लगा रही हैं. माना जा रहा था कि आने वाले समय में ईवी ही बाजार पर राज करेंगे, लेकिन अब तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है. जापान की दिग्गज ऑटो कंपनी Honda को अपनी ईवी रणनीति की वजह से बड़ा झटका लगा है. कंपनी को 70 साल में पहली बार सालाना नुकसान का सामना करना पड़ा है. 

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रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने इलेक्ट्रिक वाहनों में भारी निवेश किया था, लेकिन बाजार में ईवी की मांग उतनी तेजी से नहीं बढ़ी जितनी उम्मीद की गई थी. इसके अलावा अमेरिका में बदली नीतियों और बढ़ती लागत ने भी कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. यही वजह है कि अब Honda अपनी भविष्य की रणनीति में बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रही है और नए सिरे से कारोबार को संतुलित करने पर जोर दे रही है.

ईवी की धीमी मांग ने बिगाड़ा पूरा गणित

Honda ने वित्तीय वर्ष 2026 के लिए करीब 423 अरब येन का परिचालन नुकसान दर्ज किया है. कंपनी का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर जिस तेजी की उम्मीद थी, वह बाजार में दिखाई नहीं दी. कई देशों में ग्राहक अभी भी हाइब्रिड और पेट्रोल वाहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं. अमेरिका में ईवी खरीदने पर मिलने वाली टैक्स छूट खत्म होने और आयात शुल्क बढ़ने से भी बिक्री पर असर पड़ा. 

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इसके अलावा चीनी कंपनियों की सस्ती ईवी ने बाजार में प्रतिस्पर्धा को और कड़ा बना दिया है. ऐसे माहौल में Honda का ईवी निवेश अपेक्षित रिटर्न नहीं दे सका. कंपनी ने लागत कम करने के लिए कुछ ईवी उत्पादन लक्ष्यों में कटौती करने और कम कीमत वाले पुर्जों की सोर्सिंग बढ़ाने का फैसला लिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक ऑटो कंपनियों के लिए तेजी से बदलते ईवी बाजार के साथ तालमेल बैठाना आसान नहीं है.

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अब हाइब्रिड और मोटरसाइकिल कारोबार पर रहेगा फोकस

बदलते बाजार को देखते हुए Honda ने अपनी कई महत्वाकांक्षी ईवी योजनाओं में संशोधन किया है. कंपनी ने 2030 तक नई कार बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी को लेकर तय कुछ लक्ष्यों को वापस लेने का फैसला किया है. साथ ही 2040 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी बनने की रणनीति पर भी पुनर्विचार किया जा रहा है. Honda अब हाइब्रिड वाहनों, मोटरसाइकिल कारोबार और वित्तीय सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देने की तैयारी में है. 

कंपनी ने भारत, जापान और उत्तरी अमेरिका को अपने प्रमुख विकास बाजारों में शामिल किया है. वहीं कनाडा में ईवी और बैटरी उत्पादन से जुड़े कुछ प्रस्तावित निवेश भी रोक दिए गए हैं. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऑटो कंपनियों को केवल ईवी पर निर्भर रहने के बजाय ग्राहकों की वास्तविक मांग के अनुसार संतुलित रणनीति अपनानी होगी. Honda का यह फैसला पूरी ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है.

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