पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच पूरी दुनिया नई और सस्ती फ्यूल टेक्नोलॉजी की तलाश में लगी हुई है. ऐसे में हाल ही में एक नई तकनीक ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि आने वाले समय में कारें पानी की मदद से भी चल सकती हैं. यह सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे की तकनीक काफी दिलचस्प है. हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अब कार में सिर्फ पानी डालकर उसे सड़क पर दौड़ाया जा सकेगा. असल कहानी इससे थोड़ी अलग और ज्यादा साइंटिफिक है.

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मोनाको की कंपनी FOWE Eco Solutions ने एक खास तकनीक विकसित की है, जिसे Cavitech Fuel Emulsion Technology नाम दिया गया है. इस तकनीक में पेट्रोल या डीजल के साथ बेहद बारीक स्तर पर पानी की बूंदों को मिलाया जाता है.कंपनी का दावा है कि इससे फ्यूल ज्यादा बेहतर तरीके से जलता है और इंजन की एफिशिएंसी बढ़ जाती है.यानी कार अब भी पेट्रोल या डीजल पर ही चलेगी लेकिन पानी के इस्तेमाल से फ्यूल की खपत कम हो सकती है.

CCT पर बेस्ड है ये तकनीक

यह तकनीक Controlled Cavitation Technology यानी CCT पर आधारित है. इसमें पानी की बेहद छोटी बूंदों को ईंधन में इस तरह मिलाया जाता है कि वे इंजन के अंदर जाकर माइक्रो-एक्सप्लोजन पैदा करती हैं. इन छोटे विस्फोटों की वजह से पेट्रोल या डीजल और बेहतर तरीके से टूटता और जलता है. नतीजा यह होता है कि कम ईंधन में ज्यादा ऊर्जा मिलती है. कंपनी का दावा है कि इससे फ्यूल की खपत लगभग 10 प्रतिशत तक कम हो सकती है और साथ ही पॉल्यूशन भी घट सकता है.

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क्या है तकनीक की खासियत?

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जा रही है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए इंजन में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होगी. यानी मौजूदा पेट्रोल और डीजल इंजनों में भी इसे लागू किया जा सकता है. यही वजह है कि इसे भविष्य के लिए एक किफायती और आसान समाधान माना जा रहा है. अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है.

हालांकि एक्सपर्ट साफ कहते हैं कि कार सिर्फ पानी से चलेगी जैसी बातें पूरी तरह सही नहीं हैं. पानी खुद कोई फ्यूल नहीं है, बल्कि उससे एनर्जी निकालने के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया की जरूरत पड़ती है.कई लोग इसे हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी से जोड़कर भी देखते हैं, जहां पानी से हाइड्रोजन अलग करके उसे फ्यूल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.लेकिन वह प्रक्रिया महंगी और तकनीकी रूप से जटिल है. फिलहाल दुनिया में ऐसी कोई आम कार मौजूद नहीं है जो सीधे पानी डालने से चलने लगे.

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