Flex Fuel Cars Price: भारत में E85 फ्यूल और फ्लेक्स फ्यूल कारों को लेकर चर्चा तेजी से हो रही है. सरकार एथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा दे रही है और कई वाहन कंपनियां भी इस दिशा में काम कर रही हैं. ऐसे में बहुत से लोग नई फ्लेक्स फ्यूल कारों का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन इन गाड़ियों को खरीदने से पहले एक जरूरी सवाल सामने आता है कि क्या इनकी कीमत सामान्य पेट्रोल कारों से ज्यादा होगी.
इसका जवाब है हां. फ्लेक्स फ्यूल कारों में कई ऐसे बदलाव किए जाते हैं जो उन्हें E85 जैसे ज्यादा एथेनॉल वाले ईंधन पर चलाने लायक बनाते हैं. यही वजह है कि इनकी कीमत सामान्य मॉडल की तुलना में कुछ ज्यादा हो सकती है. हालांकि अच्छी बात यह है कि कंपनियां इन गाड़ियों को आम ग्राहकों की पहुंच में रखने की कोशिश कर सकती हैं ताकि ज्यादा लोग इस नई तकनीक को अपना सकें.
क्यों महंगी होती हैं Flex Fuel कारें?
फ्लेक्स फ्यूल कार केवल सामान्य पेट्रोल कार का बदला हुआ नाम नहीं है. इसमें कई महत्वपूर्ण हिस्सों में बदलाव करना पड़ता है. E85 फ्यूल में एथेनॉल की मात्रा काफी ज्यादा होती है, इसलिए फ्यूल टैंक, फ्यूल लाइन, इंजन कंट्रोल यूनिट यानी ECU और कुछ अन्य हिस्सों को खास तरीके से तैयार किया जाता है. इन बदलावों का सीधा असर लागत पर पड़ता है.
ऑटो सेक्टर के जानकारों का मानना है कि फ्लेक्स फ्यूल कार की कीमत सामान्य मॉडल से करीब 1 लाख रुपये तक ज्यादा हो सकती है. यह अंतर लगभग उतना ही हो सकता है जितना किसी पेट्रोल और CNG मॉडल के बीच देखने को मिलता है. हालांकि कुछ कंपनियां शुरुआती दौर में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए इस अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा खुद भी वहन कर सकती हैं. ऐसे में कुछ मॉडलों की कीमत में बहुत ज्यादा अंतर नहीं भी दिख सकता है.
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कौन सी कारें सबसे पहले आ सकती हैं बाजार में?
रिपोर्ट के अनुसार फ्लेक्स फ्यूल कारों की शुरुआत Maruti Suzuki कर सकती है और WagonR Flex Fuel इस दौड़ में सबसे आगे मानी जा रही है. इसके अलावा Tata Motors भी भविष्य में Punch का फ्लेक्स फ्यूल वर्जन ला सकती है. फिलहाल देश में E85 फ्यूल स्टेशन बहुत कम हैं और दिल्ली में इसका एक स्टेशन पहले से मौजूद है. आने वाले समय में जैसे-जैसे E85 फ्यूल पंपों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे नई फ्लेक्स फ्यूल कारों की लॉन्चिंग भी तेज हो सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआत में इन गाड़ियों की संख्या सीमित रहेगी, लेकिन ईंधन की उपलब्धता बढ़ने के बाद बाजार में ज्यादा विकल्प देखने को मिल सकते हैं. अगर सरकार और कंपनियों की योजनाएं सफल रहती हैं, तो आने वाले वर्षों में फ्लेक्स फ्यूल कारें भारतीय सड़कों पर आम नजर आ सकती हैं.
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