पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच दुनिया भर के कई देश ऐसे ऑप्शन ढूंढ रहे हैं जो सस्ते होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बेहतर हों. इसी कड़ी में एथेनॉल एक बड़ा ऑप्शन बनकर उभरा है. एथेनॉल मुख्य तौर पर गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है. इसी वजह से इसे बायो फ्यूल भी कहा जाता है. दुनिया में अगर किसी देश ने एथेनॉल बेस्ड गाड़ियों को सबसे ज्यादा अपनाया है तो वह ब्राजील है. वहां 90 फीसदी से ज्यादा नई कारें फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर चलती हैं, यानी वे पेट्रोल और एथेनॉल दोनों पर काम कर सकती हैं.
ब्राजील में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की शुरुआत 2003 में हुई थी. इसके बाद यह तकनीक इतनी पॉपुलर हुई कि आज वहां की ज्यादातर कारें किसी भी अनुपात में पेट्रोल और एथेनॉल के मिश्रण पर चल सकती हैं. कई गाड़ियां तो 100 फीसदी एथेनॉल (E100) पर भी आसानी से चल जाती हैं. ब्राजील सरकार ने सालों पहले तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल को बढ़ावा देना शुरू किया था. गन्ने के बड़े उत्पादन और मजबूत एथेनॉल उद्योग की वजह से यह प्रयोग सफल रहा और आज ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा फ्लेक्स-फ्यूल बाजार बन चुका है.
क्या है फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों का फायदा?
फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कस्टमर अपनी सुविधा और कीमत के हिसाब से फ्यूल चुन सकते हैं. अगर एथेनॉल सस्ता है तो गाड़ी चालक एथेनॉल का ज्यादा उपयोग कर सकते हैं और अगर पेट्रोल किफायती हो तो उसका उपयोग बढ़ा सकते हैं. इससे विदेशी तेल पर निर्भरता कम होती है और लोकल कृषि क्षेत्र को भी फायदा मिलता है क्योंकि एथेनॉल का प्रोडक्शन किसानों की फसलों से होता है.
सरकार दे रही बढ़ावा
एथेनॉल के कुछ नुकसान भी हैं. इसकी ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है, इसलिए एथेनॉल पर चलने वाली कारों का माइलेज थोड़ा कम मिलता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि एथेनॉल का उपयोग तब ज्यादा फायदेमंद होता है जब इसकी कीमत पेट्रोल की तुलना में काफी कम हो. ब्राजील में भी कस्टमर अक्सर कीमतों को देखकर तय करते हैं कि उन्हें पेट्रोल भरवाना है या एथेनॉल भरवाना है.
अब भारत भी इसी कड़ी में तेजी से आगे बढ़ रहा है. केंद्र सरकार एथेनॉल मिक्स फ्यूल को बढ़ावा दे रही है और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के विकास पर जोर दिया जा रहा है. हाल के सालों में कई वाहन कंपनियों ने ऐसे मॉडल पेश किए हैं जो एथेनॉल मिश्रण वाले फ्यूल पर चल सकते हैं. सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है.
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