RC Transfer: हमारे देश में सेकंड हैंड कार मार्केट बहुत बड़ा है और हर दिन हजारों गाड़ियां सेल होती हैं. लेकिन सेकंड हैंड गाड़ी में सबसे बड़ी आती है पेपर ट्रांसफर कराने में और इसमें काफी समय लग जाता है. लेकिन कुछ प्रदेश भी हैं जहां आपको बेहद कम लगता है अपनी गाड़ी के आरसी ट्रांसफर कराने में.

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इस लिए आज हम आपको इस खबर में यही बतायेंगे कि भारत के कौन से राज्य में पुरानी गाड़ी का पेपर ट्रांसफर सबसे तेज होता है. तो चलिए जानतें हैं कि कौन सा राज्य इस मामले में सबसे आगे है और आपका स्टेट किस नंबर पर आता है.

ये राज्य आते हैं टॉप पर

आपको बता दें कि ईज ऑफ व्हीकल ओनरशिप इंडेक्स की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि आरसी ट्रांसफर का काम सबसे तेजी से आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्य में होते हैं. जहां ऑनलाइन आवेदन के बाद आरसी ट्रांसफर का काम बहुत कम समय में पूरा हो जाता है.

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इसके अलावा दिल्ली और तमिलनाडु में भी ऑनलाइन पोर्टल के जरिए दस्तावेजों का वेरिफिकेशन काफी फास्ट होता है. इन राज्यों के लोगों को आरटीओ के चक्कर कम काटने पड़ते हैं और उनका काम हफ्ता-दस दिन के भीतर हो जाता है.

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इन राज्यों में लगता है 15 से 30 दिन

वहीं महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में भी ऑनलाइन सुविधा दी गई है. लेकिन आरटीओ पर काम का दबाव ज्यादा होने के कारण प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो जाती है. इन राज्यों में गाड़ी का मालिकाना हक बदलने में लगभग 15 से 30 दिन का समय लग जाता है.

हालांकि डिजिटल सिस्टम आने से पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है फिर भी कागजी जांच और कभी-कभार फिजिकल वेरिफिकेशन की वजह से थोड़ा इंतजार करना ही पड़ता है. खरीदार और विक्रेता दोनों को इसके लिए थोड़े धैर्य की जरूरत होती है.

ये राज्य हैं बहुत धीरे

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अभी भी डिजिटल और ऑनलाइन प्रक्रिया को पूरी तरह से रफ्तार पकड़ने में वक्त लग रहा है. इन जगहों पर पुरानी गाड़ी का मालिकाना हक बदलने के लिए लोगों को अक्सर ऑफलाइन प्रक्रियाओं और कागजी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है.

कई बार ऐसा देखा जाता है कि सिस्टम की सुस्ती की वजह से आरसी ट्रांसफर होने में एक से डेढ़ महीने या उससे भी ज्यादा का समय लग जाता है. जिसके चलते इन राज्यों में RC ट्रांसफर कराने में सबसे ज्यादा समय लगता है.

कैसे करें अपना स्टेटस चेक?

जानकारी दें दे कि गाड़ी का ट्रांसफर इस बात पर भी निर्भर करता है कि मामला एक ही राज्य का है या दूसरे राज्य का है. अगर आरटीओ एक ही है तो काम जल्दी हो जाता है. लेकिन इंटर-स्टेट ट्रांसफर में समय ज्यादा लगता है.

अब आप घर बैठे आधिकारिक परिवहन सेवा पोर्टल पर जाकर अपने आवेदन का लाइव स्टेटस आसानी से चेक कर सकते हैं. सरकार की कोशिश यही है कि आने वाले समय में देश के हर राज्य में पुरानी गाड़ियों का ट्रांसफर बिना किसी झंझट और बेहद कम समय में हो सके.

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