EV vs Petrol Car On Monsoon: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमत और एनवायरमेंट को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण बड़ी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक कारों की तरफ रुख कर रहे हैं. लेकिन जैसे ही मानसून का मौसम शुरू होता है, कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर बारिश और जलभराव वाली सड़कों पर ईवी ज्यादा सुरक्षित है या फिर पेट्रोल कार. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पेट्रोल या ईवी मानसून के मौसम में किस पर भरोसा कर सकते हैं और दोनों ही कारों के सिक्योरिटी फीचर्स कैसे होते हैं. 

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बारिश में कितनी सुरक्षित होती है इलेक्ट्रिक कारें? 

इलेक्ट्रिक वाहनों को हर तरह के मौसम को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है. इनमें इस्तेमाल होने वाली बैटरी पैक, हाई वोल्टेज वायरिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम को विशेष सुरक्षा मानको के तहत तैयार किया जाता है. ईवी की बैटरी को पूरी तरह सील किया जाता है, ताकि पानी और धूल उसके अंदर प्रवेश न कर सके. ज्यादातर इलेक्ट्रिक कार रेटिंग के साथ आती है, जो उनके वाटर और डस्ट रेजिस्टेंस स्तर को दर्शाती है. यही वजह है कि सामान्य बारिश में इसे सड़कों पर यह भी चलना पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है. वहीं दुनिया के कई देशों में भारी बारिश और बर्फबारी वाले इलाकों में भी इलेक्ट्रिक कारों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है, हालांकि किसी भी वाहन की तरह बहुत ज्यादा जलभराव वाले क्षेत्र में जाने से बचाना चाहिए. 

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क्या बारिश में ईवी चार्ज करना सुरक्षित?

ईवी को लेकर सबसे बड़ा भ्रम चार्जिंग को लेकर आता है. कई लोगों को लगता है कि बारिश के दौरान चार्जिंग करने से करंट लग सकता है, लेकिन आधुनिक चार्जिंग सिस्टम को कई सुरक्षा तकनीकों से लैस किया जाता है. चार्जिंग पोर्ट और कनेक्टर इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि नॉर्मल बारिश या नमी के दौरान भी सुरक्षा बनी रहे. घरेलू और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन भी निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार बनाए जाते हैं. हालांकि फिर भी चार्जिंग के समय कुछ सावधानी जरूरी है. 

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पेट्रोल कारों के लिए मुश्किल बन जाता है मानसून 

जहां इलेक्ट्रिक कारों को लेकर लोग चिंता करते हैं, वहीं बारिश का मौसम पेट्रोल और डीजल कारों के लिए भी कई चुनौतियां लेकर आता है. लगातार नमी, कीचड़ और पानी के काॅन्टेक्ट में रहने से वाहन के कई हिस्सों पर असर पड़ सकता है. सबसे पहले कार की लाइट्स पर ध्यान देना जरूरी है. हेडलाइट, फोग लाइट और टेललाइट की केसिंग में दरार या लीकेज होने पर पानी अंदर जा सकता है, जिससे रोशनी प्रभावित हो सकती है. रबर सील भी मानसून में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है. अगर दरवाजा और खिड़कियों की रबर सील खराब हो जाए तो पानी केबिन में प्रवेश कर सकता है और अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है. 

मानसून में किस पर भरोसा करें?

सुरक्षा के लिहाज से देखें तो ईवी और पेट्रोल कार दोनों ही बारिश में सुरक्षित मानी जाती है. इलेक्ट्रिक कारों में बैटरी और चार्जिंग सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए एडवांस वॉटरप्रूफ और इलेक्ट्रिकल प्रोटेक्शन दिया जाता है. वहीं पेट्रोल कारों में इंजन ब्रेक के लाइट्स और अंडरबॉडी की नियमित देखभाल जरूरी होती है.

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