भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बाजार अब तेजी से बढ़ रहा है. पहले लोग EV खरीदते समय सिर्फ कीमत और उपयोग पर ध्यान देते थे, लेकिन अब सोच बदल रही है. राज्यों की नई पॉलिसी और इंसेंटिव ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है. अब अलग-अलग राज्यों में EV खरीदने वालों का तरीका भी अलग दिखने लगा है. इस बदलाव को समझने के लिए एक उदाहरण लें. बेंगलुरु में एक युवा प्रोफेशनल पहले हाइब्रिड कार खरीदने गया था, क्योंकि उसे वह ज्यादा सुरक्षित लगा. लेकिन जब उसे इलेक्ट्रिक कार पर मिलने वाली टैक्स छूट और कम रजिस्ट्रेशन फीस के बारे में पता चला, तो उसका फैसला बदल गया. आखिर में वह इलेक्ट्रिक कार लेकर ही घर गया. ऐसे छोटे-छोटे फैसले अब बड़े ट्रेंड में बदल रहे हैं.

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राज्यों की पॉलिसी और इंसेंटिव का असर

भारत में EV की ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान राज्यों की नीतियों का है. कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य इस मामले में आगे हैं. यहां सरकारें रोड टैक्स में छूट, खरीद पर सब्सिडी और आसान रजिस्ट्रेशन जैसी सुविधाएं दे रही हैं. इन इंसेंटिव की वजह से EV की शुरुआती कीमत कम हो जाती है, जिससे आम लोगों के लिए इसे खरीदना आसान हो जाता है. साथ ही, EV चलाने का खर्च भी कम होता है, जिससे लोग इसे एक फायदेमंद विकल्प मानने लगे हैं. यही कारण है कि अब EV सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि बचत के लिए भी खरीदी जा रही है.

अलग-अलग राज्यों में EV बिक्री का हाल

अगर बिक्री की बात करें तो उत्तर प्रदेश EV मार्केट में सबसे आगे है. यहां करीब 6 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिके हैं, जिनमें ज्यादातर तीन-पहिया वाहन हैं. यहां लोगों के लिए EV कम खर्च और ज्यादा कमाई का जरिया बन रहा है. महाराष्ट्र में लगभग 4 लाख EV बिके हैं. मुंबई और पुणे जैसे शहरों में इलेक्ट्रिक कार और दोपहिया दोनों की मांग तेजी से बढ़ रही है. वहीं कर्नाटक, खासकर बेंगलुरु, एक बड़ा शहरी बाजार बन चुका है जहां लोग गाड़ी की कुल लागत पर ज्यादा ध्यान देते हैं. तमिलनाडु में भी EV की बिक्री बढ़ी है, क्योंकि यह राज्य EV बनाने का बड़ा केंद्र भी है. पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में किफायती कीमत और इंसेंटिव के कारण दो और तीन-पहिया EV तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं.

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EV ग्रोथ की असली वजह क्या है

EV मार्केट की तेजी से बढ़ती मांग के पीछे सिर्फ सरकारी नीतियां ही नहीं, बल्कि उनका सही तरीके से लागू होना भी है. जब लोगों को साफ और आसान इंसेंटिव मिलते हैं, तो वे जल्दी फैसला ले पाते हैं. इसके अलावा अब लोग पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमत से भी बचना चाहते हैं. EV चलाने में कम खर्च आता है और मेंटेनेंस भी सस्ता होता है. यही वजह है कि अब लोग इसे एक समझदारी भरा निवेश मानने लगे हैं.

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