अगर आप इलेक्ट्रिक कार खरीदने की सोच रहे हैं तो आपके मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि कुछ साल बाद इसकी बैटरी खराब हो जाएगी या फिर लाखों रुपये खर्च करके नई बैटरी लगवानी पड़ेगी. यही डर आज भी बहुत से लोगों को EV खरीदने से रोकता है. लेकिन हाल ही में सामने आई एक बड़ी रिसर्च ने इस चिंता को काफी हद तक गलत साबित कर दिया है. दुनियाभर की करीब 1000 इलेक्ट्रिक कारों के डेटा के बाद पता चला है कि लाखों किलोमीटर चलने के बाद भी EV की बैटरी पूरी तरह खराब नहीं होती, बल्कि उसकी कैपेसिटी में केवल थोड़ा-बहुत फर्क आता है.

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लाखों KM चलने के बाद भी अच्छी परफॉर्मेंस 

EV डेटा ट्रैक करने वाली फर्म Recurrent ने उन इलेक्ट्रिक कारों का डेटा इकठ्ठा किया, जो लगभग 2.41 लाख किलोमीटर तक चल चुकी थीं. इसके बाद जो नतीजे सामने आए वे काफी चौंकाने वाले थे. नई जनरेशन की इलेक्ट्रिक कारें इतनी लंबी दूरी तय करने के बाद भी अपनी लगभग 91 प्रतिशत रेंज बनाए रखती हैं. यानी बैटरी कैपेसिटी में सिर्फ 9 प्रतिशत की गिरावट आती है. इसका मतलब यह हुआ कि अगर नई कार शुरू में एक बार चार्ज करने पर 500 किलोमीटर चलती थी तो लाखों किलोमीटर चलने के बाद भी वह करीब 450 किलोमीटर तक चल सकती है. 

रिसर्च में यह भी बताया गया कि पुराने और नए मॉडल्स में काफी अंतर है. साल 2012 के आसपास बनी EV कारों में बैटरी टेक्नोलॉजी उतनी एडवांस नहीं थी. इसलिए लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद उनकी रेंज घटकर लगभग 81 प्रतिशत रह जाती थी. लेकिन नई टेक्नोलॉजी आने के बाद बैटरियां ज्यादा मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ हो गई हैं. इससे साफ है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी लाइफ और भी बेहतर होने वाली है.

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बैटरी की क्वालिटी पर किया गया काम

सबसे बड़ी राहत देने वाली बात यह है कि आज की नई इलेक्ट्रिक कारों में बैटरी बदलने की नौबत बहुत कम आती है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 के बाद बनी EV में केवल 0.3 प्रतिशत मामलों में बैटरी बदलने की जरूरत पड़ी. यानी लगभग न के बराबर ऐसा है. वहीं पुरानी EV में यह आंकड़ा 8.5 प्रतिशत तक था. इससे पता चलता है कि कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में बैटरी की क्वालिटी पर काफी काम किया है.

अब सवाल आता है कि आखिर कंपनियों ने ऐसा क्या बदला कि बैटरियां इतनी लंबे समय तक चलने लगीं? इसके पीछे तीन बड़े कारण बताए गए हैं. पहला, बैटरी के अंदर इस्तेमाल होने वाले केमिकल और मटेरियल पहले से ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनाए गए हैं. दूसरा, नई EV में एडवांस कूलिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जो बैटरी को ज्यादा गर्म या ज्यादा ठंडा होने से बचाते हैं. तीसरा, कार का स्मार्ट सॉफ्टवेयर बैटरी को पूरी तरह खाली या जरूरत से ज्यादा चार्ज नहीं होने देता, जिससे उसकी उम्र बढ़ जाती है.

बैटरी की कीमतें हुईं कम 

अगर किसी EV की बैटरी में खराबी आती भी है तो ज्यादातर मामलों में वह मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट होता है. ऐसी स्थिति में कंपनियां वारंटी के तहत बैटरी को फ्री में बदल देती हैं. इसके अलावा पिछले कुछ सालों में बैटरी की कीमतें भी तेजी से कम हुई हैं, इसलिए अब EV की मेंटेनेंस पहले की तुलना में काफी सस्ती हो गई है. ऐसे में यह उन लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है, जो बैटरी खराब होने के डर से इलेक्ट्रिक कार खरीदने से बचते हैं. 

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