Electric Vehicle Battery: जब भी इलेक्ट्रिक कारों की बात होती है, तो ज्यादातर लोग बैटरी की रेंज, चार्जिंग और परफॉर्मेंस पर ध्यान देते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि EV की बैटरी का सफर गाड़ी से निकलने के बाद भी खत्म नहीं होता. दरअसल, एक इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी कई साल तक इस्तेमाल होने के बाद भी पूरी तरह बेकार नहीं होती. उसकी क्षमता भले कम हो जाए, लेकिन वह दूसरे कई कामों में उपयोग की जा सकती है. 

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यही वजह है कि दुनिया भर में EV बैटरी की सेकेंड लाइफ और रीसाइक्लिंग से जुड़ा कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह उद्योग अरबों रुपये के बाजार में बदल सकता है. जैसे-जैसे सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे पुरानी बैटरियों की मांग और उनके दोबारा इस्तेमाल का कारोबार भी तेजी से आगे बढ़ेगा.

गाड़ी से निकलने के बाद कहां इस्तेमाल होती है EV बैटरी?

आमतौर पर जब किसी EV बैटरी की क्षमता 70 से 80 प्रतिशत तक रह जाती है, तो उसे वाहन में इस्तेमाल के लिए कम उपयुक्त माना जाता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बैटरी खत्म हो गई. ऐसी बैटरियों को सेकेंड लाइफ प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल किया जाता है. इनका उपयोग घरों, कार्यालयों और सोलर एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में बिजली जमा करने के लिए किया जा सकता है. 

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कई कंपनियां पुरानी EV बैटरियों को ऊर्जा भंडारण यूनिट में बदल रही हैं. इससे बिजली की बचत और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग में मदद मिलती है. यही कारण है कि पुरानी बैटरियां अब एक नई आर्थिक संभावना के रूप में देखी जा रही हैं. कई देशों में इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश भी किया जा रहा है और भारत में भी यह बाजार तेजी से आकार ले रहा है.

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बैटरी रीसाइक्लिंग बन रही है भविष्य का बड़ा कारोबार

EV बैटरी का दूसरा महत्वपूर्ण चरण रीसाइक्लिंग है. बैटरी में लिथियम, निकल, कोबाल्ट और अन्य कीमती धातुएं मौजूद होती हैं. जब बैटरी पूरी तरह उपयोग के लायक नहीं रहती, तब इन धातुओं को निकालकर दोबारा नई बैटरियों और अन्य उत्पादों में इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे कच्चे माल की जरूरत कम होती है और पर्यावरण पर दबाव भी घटता है. यही वजह है कि दुनिया की कई बड़ी कंपनियां बैटरी रीसाइक्लिंग प्लांट लगाने में निवेश कर रही हैं. 

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में EV बैटरी रीसाइक्लिंग और सेकेंड लाइफ बाजार ऑटो इंडस्ट्री का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगा. यानी जिस बैटरी को लोग एक समय सिर्फ कार का हिस्सा समझते हैं, वही आगे चलकर ऊर्जा और रीसाइक्लिंग उद्योग की सबसे मूल्यवान संपत्तियों में शामिल हो सकती है. यही कारण है कि EV बैटरी की कहानी गाड़ी से निकलने के बाद समाप्त नहीं होती है.

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