आज के समय में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों की चर्चा तेजी से बढ़ रही है. पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच लोग ऐसी गाड़ियों की तरफ जा रहे हैं जो कम खर्च में ज्यादा दूरी तय कर सकें. लेकिन एक बड़ा सवाल हमेशा लोगों के मन में रहता है कि बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड के मौसम में कौन-सी गाड़ी बेहतर काम करती है? अब इस सवाल का जवाब एक नई स्टडी में सामने आया है. अमेरिका की ऑटोमोबाइल संस्था AAA की रिसर्च के मुताबिक,
ज्यादा गर्मी और ठंड दोनों ही इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों की परफॉर्मेंस को प्रभावित करते हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक कारों पर इसका असर ज्यादा दिखाई देता है. AAA ने अपनी स्टडी में तीन इलेक्ट्रिक कारों और तीन हाइब्रिड कारों की अलग-अलग तापमान में टेस्टिंग की. इसके लिए गाड़ियों को बहुत ठंडे मौसम यानी लगभग 20°F और बहुत गर्म मौसम यानी करीब 95°F में चलाकर देखा गया. रिसर्च का मकसद यह समझना था कि मौसम बदलने से इन गाड़ियों की रेंज, माइलेज और खर्च पर कितना असर पड़ता है.
सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक कारों पर असर
स्टडी में पता चला कि ठंड का असर सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक कारों पर पड़ता है. बहुत ठंडे मौसम में EV यानी इलेक्ट्रिक कारों की एफिशिएंसी लगभग 35.6 प्रतिशत तक कम हो गई, जबकि उनकी ड्राइविंग रेंज में करीब 39 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई. आसान भाषा में समझें तो अगर कोई इलेक्ट्रिक कार सामान्य मौसम में 400 किलोमीटर चलती है तो बहुत ज्यादा ठंड में उसकी रेंज लगभग 240–250 किलोमीटर तक कम हो सकती है. वहीं हाइब्रिड कारों पर भी ठंड का असर पड़ा, लेकिन वह इलेक्ट्रिक कारों जितना ज्यादा नहीं था. रिसर्च के अनुसार ठंडे मौसम में हाइब्रिड कारों का माइलेज करीब 22.8 प्रतिशत तक कम हो गया. यानी हाइब्रिड गाड़ियों में भी फ्यूल की खपत बढ़ी, लेकिन उनकी स्थिति EVs से थोड़ी बेहतर रही.
हाइब्रिड कारों को भी नुकसान
गर्मी के मौसम में भी दोनों तरह की गाड़ियों की परफॉर्मेंस प्रभावित हुई. करीब 95°F तापमान पर इलेक्ट्रिक कारों की एफिशिएंसी में 10.4 प्रतिशत की कमी आई और उनकी रेंज लगभग 8.5 प्रतिशत तक घट गई. वहीं हाइब्रिड कारों का माइलेज करीब 12 प्रतिशत तक कम हो गया. यानी गर्म मौसम में हाइब्रिड कारों को भी नुकसान हुआ, लेकिन ठंड की तुलना में असर कम था. स्टडी में यह भी सामने आया कि मौसम बदलने से गाड़ियों को चलाने का खर्च भी बढ़ जाता है. ठंड में इलेक्ट्रिक कारों को चार्ज करने की लागत बढ़ गई, खासतौर पर उन लोगों के लिए जो पब्लिक चार्जिंग स्टेशन का इस्तेमाल करते हैं. वहीं हाइब्रिड कारों में ईंधन की खपत बढ़ने के कारण पेट्रोल का खर्च ज्यादा हुआ. रिसर्च के अनुसार अगर EV को घर पर चार्ज किया जाए तो खर्च में रहता है, लेकिन पब्लिक चार्जिंग इस्तेमाल करने पर लागत काफी बढ़ सकती है.
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