भारत में इलेक्ट्रिक वाहन यानी EV का चलन तेजी से बढ़ रहा है. लोग पेट्रोल और डीजल गाड़ियों से हटकर इलेक्ट्रिक कार और बाइक की ओर जा रहे हैं,लेकिन EV खरीदने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही आता है कि इसे कितना चार्ज करना सही है. अक्सर विशेषज्ञ 80% तक ही चार्ज करने की सलाह देते हैं. ऐसा करने से बैटरी की सेहत बेहतर रहती है और लंबे समय में फायदा मिलता है. आइए विस्तार से जानते हैं.
80% चार्जिंग नियम क्यों है जरूरी?
आज की मॉडर्न EV में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी BMS लगा होता है. यह सिस्टम बैटरी को सेफ और बैलेंस तरीके से काम करने में मदद करता है. फिर भी, अगर बैटरी को हर बार 100% तक चार्ज किया जाए, तो उसकी उम्र पर असर पड़ सकता है. 80% तक चार्ज करने से बैटरी पर कम दबाव पड़ता है. ज्यादा चार्ज लेवल पर बैटरी के अंदर रुकावट बढ़ जाती है, जिससे उसे पूरा भरने में ज्यादा समय लगता है. यही कारण है कि 80% से 100% तक चार्ज होने में ज्यादा समय लगता है. अगर बार-बार 100% तक चार्ज किया जाए, तो बैटरी जल्दी कमजोर हो सकती है.
बैटरी की बढ़ती है उम्र
EV की बैटरी बहुत महंगी होती है. अगर बैटरी खराब हो जाए तो उसे बदलने में बड़ा खर्च आता है. 80% तक चार्जिंग रखने से बैटरी की सेहत लंबे समय तक अच्छी रहती है. इससे उसकी लाइफ बढ़ती है और भविष्य में खर्च कम होता है. अगर कभी लंबी जर्नी करनी हो, तो 100% तक चार्ज करना ठीक है. लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल में 80% का नियम अपनाना बेहतर माना जाता है.
समय की भी होती है बचत
EV को पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की तरह कुछ मिनट में तैयार नहीं किया जा सकता. 80% तक बैटरी जल्दी चार्ज हो जाती है, लेकिन उसके बाद चार्जिंग की गति धीमी हो जाती है. इसलिए 80% पर चार्ज हटाने से समय की बचत होती है. इसके अलावा, चार्जिंग स्टेशन पर भीड़ कम रहती है और दूसरे लोग भी जल्दी अपनी गाड़ी चार्ज कर सकते हैं. अधिकतर इलेक्ट्रिक वाहनों में रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम होता है. जब आप ब्रेक लगाते हैं या गाड़ी धीमी करते हैं, तो यह सिस्टम ऊर्जा को वापस बैटरी में स्टोर करता है. अगर बैटरी पहले से 100% भरी हो, तो यह अतिरिक्त ऊर्जा स्टोर नहीं हो पाती. लेकिन अगर बैटरी 80% तक चार्ज हो, तो उसमें जगह बची रहती है और रीजनरेटिव ब्रेकिंग का पूरा फायदा मिलता है.
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