भारत के किसानों के आय को बढ़ाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है. खेती के दौरान किसानों भाइयों का खर्चा ट्रेक्टर से होने वाले जुताई में काफी ज्यादा लगता है. क्योंकि डीजल से चलने वाले ट्रेक्टर जुताई के दौरान काफी महंगे चार्ज करते हैं. लेकिन अब भारत में डीजल गाड़ियों का ट्रेंड धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लोग शिफ्ट हो रहे हैं.

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लेकिन ट्रैक्टर के मामले में अभी ऐसा बहुत ही कम देखने को मिल रहा है. हालांकि अब ऐसा माना जा रहा है कि बहुत जल्द इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर मार्केट में आ जाएंगे और इससे किसानों को आर्थिक रूप काफी राहत मिलेगी. ऐसा हम नहीं बल्कि रिपोर्ट में खुलासा हुआ है. चलिए इस खबर में विस्तार से जानतें हैं पूरी खबर के बारें में.

इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों में है बचत

बता दें कि आईसीसीटी की ताजा रिपोर्ट में ऊर्जा की बचत और खर्च पर बात की गई है. स्टडी के मुताबिक इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर एक एकड़ खेत की जुताई और दूसरे कृषि कामों  को डीजल ट्रैक्टरों के मुकाबले लगभग 64 से 84 प्रतिशत तक कम ऊर्जा खर्च में पूरा कर सकते हैं. इस प्रोजेक्ट के दौरान अलग-अलग कंपनियों के पांच इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों का इस्तेमाल करके रियल वर्ल्ड डेटा इकट्ठा किया गया था.

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जबकि इन ट्रैक्टरों से खेत में जुताई, बुआई, पराली और ट्रांसपोर्ट से जुड़े काम कराए गए थे. इन सभी कामों के दौरान यह बात साफ हो गई कि बिजली से चलने वाले ये ट्रैक्टर डीजल की तुलना में बहुत कम खर्च में अच्छे रिजल्ट दे रहे हैं. इससे किसानों का फ्यूल का खर्चा सीधे तौर पर बहुत ज्यादा कम हो जाएगा.

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प्रदूषण भी होगा कम

जबकि खेती के अलावा डीजल से चलने वाले ट्रैक्टरों का इस्तेमाल कई तरह के इंडस्ट्रियल और कमर्शियल कामों में भी बड़े पैमाने पर होता है. इन भारी वाहनों के चलने से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचाता है और प्रदूषण की समस्या को गंभीर बना देता है. खासकर दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े इलाकों में. लेकिन इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के इस्तेमाल से इस प्रकार के प्रदूषण को बहुत हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.

क्योंकि इनसे किसी तरह का हानिकारक धुआं या प्रदूषण नहीं फैलता है. जबकि इसके अलावा सरकार द्वारा आने वाले समय में पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कड़े नियम भी लाए जा सकते हैं. ऐसे में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने के साथ-साथ देश के ग्रीन मोबिलिटी विजन को आगे बढ़ाने में भी एक बहुत ही अहम भूमिका निभा सकते हैं.

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सरकारी सब्सिडी मिलनी चाहिए

जबकि इसके अलावा इस नई रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि सरकार को कमर्शियल और कृषि उपयोग वाले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को भी अपनी सब्सिडी योजनाओं के दायरे में शामिल करना चाहिए. इस समय कई तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों को सरकार की तरफ से वित्तीय सहायता और छूट मिलती है. लेकिन ट्रैक्टरों के लिए इस दिशा में और तेजी से काम करने की जरूरत है.

बता दें कि आईसीसीटी ने सुझाव दिया है कि सरकार को सर्टिफाइड इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर मॉडल्स को अपनी अप्रूव्ड एग्रीकल्चरल मशीनरी की सूची में तुरंत शामिल करना चाहिए. इसके साथ ही नगर निगमों के कचरा प्रबंधन और एयरपोर्ट के ग्राउंड लॉजिस्टिक्स जैसे कामों में भी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है ताकि इनकी मांग बाजार में तेजी से बढ़ सके.

चार्जिंग नेटवर्क पर करना होगा काम

हमारे देश में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को पूरी तरह से अपनाने के लिए मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का होना बेहद जरूरी है. रिपोर्ट में इस बात पर काफी जोर दिया गया है कि ग्रामीण और कृषि प्रधान इलाकों में भी तेज गति से चार्जिंग स्टेशन तैयार किए जाने चाहिए. जबकि इसके अलावा बैटरी स्वैपिंग तकनीक और फास्ट चार्जिंग के नए पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू करने का सुझाव भी दिया गया है.

ताकि किसानों को काम के दौरान बैटरी चार्ज करने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. यदि सरकार और कंपनियां मिलकर इस बुनियादी ढांचे को मजबूत कर देती हैं तो किसानों के लिए इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को अपनाना बहुत आसान हो जाएगा और वे बिना किसी झंझट के कम खर्च में खेती कर सकेंगे.

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