जब कुछ साल पहले हमारे देश में इलेक्ट्रिक गाड़ी और स्कूटर लॉन्च हुए थे तो इसपर कोई भरोसा नहीं करता था और सभी का मानना था की यह प्लान फ्लॉप साबित हो जायेगा. लेकिन हुआ इसके ठीक उल्टा. क्योंकि अब भारत में इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर खूब बिक रहें हैं. जबकि रिपोर्ट्स के मुताबिक यह आने वाले समय में और भी बढ़ता दिखेगा. वहीं अब कार और स्कूटर ही नहीं बल्कि अब इंडिया में इलेक्ट्रिक ट्रक भी बहुत जल्द होने जा रहे हैं. जिसके चलते अब डीजल ट्रकों की छुट्टी हो सकती है.
बता दें कि मुंबई बेस्ड इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कंपनी ईआईएम हैवी कमर्शियल व्हीकल मार्केट में एक बहुत बड़ा दांव खेलने की तैयारी कर रही है. क्योंकि कंपनी बहुत जल्द दो नए हैवी-ड्यूटी इलेक्ट्रिक ट्रक लॉन्च करने जा रही है. चलिए जानते हैं कि ईआईएम के इन नए हैवी इलेक्ट्रिक ट्रकों में क्या-क्या खास तकनीक देखने को मिलेगी और इसका उत्पादन कहां किया जाएगा.
पुणे में होगी मैन्यूफैक्चरिंग
बता दें कि ईआईएम इन नए हैवी-ड्यूटी इलेक्ट्रिक ट्रकों का निर्माण और असेंबलिंग महाराष्ट्र के पुणे स्थित अपने तलेगांव मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट में करेगी. कंपनी का यह विशाल कॉम्प्लेक्स 35,000 वर्ग मीटर से भी ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ है. जहां ट्रकों की असेंबलिंग के साथ-साथ बैटरी पैक्स भी बनाये जाते हैं और उनकी कड़ी टेस्टिंग की जाती है.
इस प्लांट की मौजूदा क्षमता सालाना 5,000 इलेक्ट्रिक ट्रकों को असेंबल करने की है. जिसे भविष्य में मांग बढ़ने पर और ज्यादा बढ़ाया जा सकता है. इसके अलावा प्लांट में 10,920 वर्ग मीटर में फैली एक बड़ा बैटरी असेंबली लाइन भी मौजूद है. इस बैटरी लाइन की सालाना उत्पादन क्षमता 2.4 GWh है. जो लगभग 6,000 बैटरी बॉक्स तैयार करने के बराबर है.
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7.5 लाख किलोमीटर की लंबी बैटरी लाइफ
जानकारी दें दे कि ईआईएम के इन नए हैवी-ड्यूटी इलेक्ट्रिक ट्रकों की सबसे बड़ी ताकत इनकी एडवांस बैटरी और पावरफुल परफॉर्मेंस होने वाली है. क्योंकि कंपनी इन ट्रकों में 400.5 kWh क्षमता वाला बेहद भारी-भरकम बैटरी पैक इस्तेमाल करेगी. जबकि सबसे खास बात यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली नई बैटरी तकनीक दुनिया की जानी-मानी कंपनी CATL के CB7T0 सेल्स पर बनी है.
जबकि रिपोर्ट्स के मुताबिक इस एडवांस बैटरी पैक की अनुमानित लाइफ लगभग 7.5 लाख किलोमीटर तक रखी गई है. इतनी लंबी बैटरी लाइफ का मतलब है कि ट्रांसपोर्ट मालिकों को सालों-साल तक बैटरी बदलने का कोई बड़ा भारी खर्च नहीं उठाना पड़ेगा और उनका ट्रक बिना किसी दिक्कत के कई सालों तक चलता रहेगा.
डीजल ट्रकों का खेल खत्म?
बता दें कि ईआईएम के इस कदम के बाद यह साफ हो गया है कि भारी माल ढोने और माइनिंग के क्षेत्र में अब डीजल ट्रकों का एकतरफा राज काम हो जाएगा. पारंपरिक डीजल ट्रकों के मुकाबले इन इलेक्ट्रिक टपर्स और रिजिड-बॉडी ट्रकों को चलाने का प्रति किलोमीटर खर्च बेहद कम आता है.
जबकि इसके साथ ही इसमें गियरबॉक्स और डीजल इंजन न होने के कारण सर्विसिंग का झंझट न के बराबर रह जाता है. हालांकि शुरुआती दौर में इनकी कीमत डीजल ट्रकों से थोड़ी अधिक हो सकती है. लेकिन कम रनिंग कॉस्ट और 7.5 लाख किमी की तगड़ी बैटरी लाइफ के चलते ये इलेक्ट्रिक ट्रक ट्रांसपोर्टर्स के पैसे बचाने में बहुत बड़ा गेमचेंजर साबित होने जा रहे हैं.
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