अगर आप भी एक्सप्रेसवे या हाईवे पर सफर करते हैं तो यह खबर आपके लिए ही है. क्योंकि, क्या कभी आपने ने सोचा है कि, जो आप टोल पर पैसा देते हैं वह सरकार के खाते में नहीं जाता है. जी हा आपने बिल्कूल सही सुना है. दरअसल, टोल कलेक्शन को लेकर देश भर में एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े और घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. जिसने आम जनता से लेकर सरकारी एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं.

Continues below advertisement

बता दें कि, ED ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के विभिन्न टोल प्लाजा पर अवैध वसूली और हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक साथ कई राज्यों में बड़ी छापेमारी की है. इस कार्रवाई के बाद से हाईवे पर सफर करने वाले चालकों को टोल रसीद की जांच करने के लिए सतर्क किया जा रहा है. अगर आप भी इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार होने से बचना चाहते हैं तो हर बार टोल पार करने के बाद रसीद और मैसेज को ध्यान से देखना बेहद जरूरी हो गया है.

ED की बड़ी कार्रवाई

आपको बता दें कि, प्रवर्तन निदेशालय ED ने टोल प्लाजा कलेक्शन घोटाले को लेकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल में एक साथ छापेमारी की. पुलिस की दो शुरुआती एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत यह केस दर्ज किया गया था.

Continues below advertisement

ईडी अधिकारियों के मुताबिक टोल बूथ पर तैनात कुछ निजी एजेंसियां और ठेकेदार एक समानांतर फर्जी सिस्टम चला रहे थे जिसकी मदद से करोड़ों रुपये का टोल टैक्स सरकारी सिस्टम से बाहर ही डायवर्ट किया जा रहा था.

Image Credit- AI Generated

यह भी पढ़ें: Fortuner वालों को पसंद आएगी नई Pajero, लेकिन खरीद नहीं पाएंगे

फर्जी सॉफ्टवेयर से हो रहा था खेल

जानकारी दें दे कि, फॉरेंसिक जांच और NHAI के आधिकारिक रिकॉर्ड्स के मिलान में यह सच सामने आया कि टोल प्लाजा पर रसीद काटने के लिए अनधिकृत और फर्जी ऐप्स का सहारा लिया जा रहा था. जब कोई गाड़ी टोल पर आती थी तो चालक को रसीद तो असली जैसी ही थमा दी जाती थी.

लेकिन बैकएंड सिस्टम में वह ट्रांजैक्शन दर्ज ही नहीं होता था. फास्टैग सिस्टम में भी हेरफेर करके नगद या डिजिटल पेमेंट के जरिए चालकों को ठगा जा रहा था और यह पूरी फर्जी वसूली बिना किसी सरकारी एंट्री के सालों से चल रही थी.

जरूर चेक करें ये खास बातें

अगर आप टोल प्लाजा पर होने वाले इस फर्जीवाड़े से खुद को बचाना चाहते हैं तो उसके लिए आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान देने की जरूरत है. जब भी टोल से रसीद मिले या मोबाइल पर FASTag का कटने का मैसेज आए तो सबसे पहले उस पर दर्ज टोल प्लाजा का नाम, समय, गाड़ी का सही नंबर और कटी हुई राशि का मिलान करें.

वहीं, अगर आपको रसीद में कोई क्यूआर कोड गायब मिले, एनएचएआई का लोगो अजीब लगे या फास्टैग कटने का मैसेज न आए तो तुरंत संदेह जताएं और टोल मैनेजर से जवाब मांगें.

Image Credit- AI Generated

हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज कराएं शिकायत

वहीं, अगर आपको किसी भी टोल प्लाजा पर रसीद या फास्टैग कटौती को लेकर कोई गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा नजर आता है तो तुरंत NHAI के हेल्पलाइन नंबर 1033 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं.

आपकी थोड़ी सी जागरूकता न सिर्फ आपको धोखाधड़ी से बचाएगी बल्कि देश के राजस्व को चुराने वाले ऐसे टोल माफियाओं पर नकेल कसने में भी मदद करेगी. सड़क पर सफर करते समय जल्दबाजी में टोल पर्ची छोड़े बिना हमेशा उसे अपने पास संभाल कर रखें और पूरा हिसाब जांचें.

यह भी पढ़ें: पुरानी Petrol कार को CNG बनाना सही? पहले करें ये Check


Car loan Information:

Calculate Car Loan EMI