E20 Fuel Awareness: भारत में एथेनॉल फ्यूल को लेकर अभी कई प्रकार की बहस चल रही है. सोशल मीडिया से लेकर गली-नुक्कड़ तक अभी सभी के जुबान पर E20 फ्यूल को लेकर चर्चा है. बता दें कि, कई तरह के अफवाहों और भ्रम को दूर करने के लिए देश के ऑटोमोबाइल डीलर्स ने एक बहुत बड़ा और राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू कर दिया है. 

Continues below advertisement

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में अब देश भर के करीब 30,000 से ज्यादा गाड़ी शोरूम्स पर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. तो चलिए जानतें हैं कि, इस मुहीम से क्या फायदा होने वाला है.

अफवाहों पर लगेगी लगाम

बता दें कि, इस अभियान के तहत अब देश के हर कोने में मौजूद छोटे-बड़े ऑटोमोबाइल शोरूम पर E20 ईंधन पूरी तरह सुरक्षित है के बड़े-बड़े बैनर्स और पोस्टर्स लगाए जा रहे हैं. फाडा और प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों का मकसद ग्राहकों को यह भरोसा दिलाना है कि सरकार की यह नीति पूरी तरह से सही है. 

Continues below advertisement

जबकि मीडिया की खबरों को तोड़-मरोड़ कर सोशल मीडिया पर जो डर फैलाया जा रहा था उस पर लगाम लगाने के लिए खुद डीलर्स ने अब कमान संभाल ली है ताकि आम जनता बिना किसी हिचकिचाहट के फ्यूल भरवा सके.

यह भी पढ़ें: जाम में फंस गए तो कार चलाते वक्त इन बातों का रखें ध्यान, वरना क्लच हो जाएगा खराब

कर्मचारियों को देनी होगी सटीक जानकारी

आपने देखा अक्सर देखा होगा कि शोरूम पर जाने वाले ग्राहकों को वहां के स्टाफ से सटीक तकनीकी जानकारी नहीं मिल पाती थी. जिससे कंफ्यूजन और बढ़ जाता था. इसी को देखते हुए इस अभियान से पहले डीलरशिप पर काम करने वाले सभी सेल्स और सर्विस कर्मचारियों को एआरएआई और सियाम के मानकों के आधार पर खास ट्रेनिंग दी गई है. 

अब शोरूम का स्टाफ ग्राहकों को यह आसानी से समझा सकेगा कि E20 पेट्रोल कोई नया या एक्सपेरिमेंटल फ्यूल नहीं है. बल्कि यह पूरी तरह से टेस्टेड और वैज्ञानिक पैमानों पर खरा उतरा हुआ सुरक्षित ईंधन है.

दिग्गज कंपनियों ने भी दी हरी झंडी

बता दें कि, इस अभियान में देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियां भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं. मारुति सुजुकी, टोयोटा और महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियों ने अपने आधिकारिक सर्विस रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए साफ कर दिया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से किसी भी गाड़ी के इंजन खराब होने या इंश्योरेंस क्लेम बढ़ने का कोई अजीब मामला सामने नहीं आया है.

कंपनियों ने यह साफ कर दिया है कि एथेनॉल की डेंसिटी कम होने की वजह से माइलेज में महज 3 से 4% का अंतर आ सकता है लेकिन गाड़ी की लाइफ, इंजन की मजबूती और परफॉर्मेंस पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ता है. 

यह भी पढ़ें: Ola-Uber यूजर्स और ड्राइवरों को मिलेगी बड़ी राहत, जल्द लागू होने जा रही नई पॉलिसी


Car loan Information:

Calculate Car Loan EMI