अगर आपके पास पुरानी पेट्रोल कार या बाइक है और आप E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए काम की है. सरकार देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए E20 फ्यूल को तेजी से बढ़ावा दे रही है.

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E20 पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल और 80 फीसदी सामान्य पेट्रोल का मिश्रण होता है. हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि कुछ पुराने BS-III वाहनों में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से पहले फ्यूल सिस्टम के कुछ रबर वाले पार्ट्स बदलने पड़ सकते हैं. अच्छी बात यह है कि इसके लिए इंजन बदलने या किसी बड़े तकनीकी बदलाव की जरूरत नहीं होगी.

कैसे तैयार किया जाता है E20 फ्यूल?

  • E20 एक ऐसा फ्यूल है जिसमें 20 फीसदी एथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल मिलाया जाता है. एथेनॉल गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है. सरकार का उद्देश्य इस फ्यूल के जरिए कच्चे तेल के आयात को कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और वाहन प्रदूषण में कमी लाना है. यही वजह है कि देशभर में धीरे-धीरे E20 पेट्रोल उपलब्ध कराया जा रहा है.
  • E20 पेट्रोल का असर मुख्य रूप से उन BS-III पेट्रोल गाड़ियों पर पड़ सकता है, जिन्हें E20 फ्यूल को ध्यान में रखकर डिजाइन नहीं किया गया था. ये गाड़ियां आमतौर पर 2005 के बाद और 2016 से पहले बनाई गई थीं.ऐसी गाड़ियों में फ्यूल सिस्टम के कुछ रबर से बने पार्ट्स लंबे समय तक E20 के संपर्क में रहने पर जल्दी खराब हो सकते हैं.

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  • सरकार के मुताबिक, इंजन में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होगी. जरूरत पड़ने पर सिर्फ फ्यूल सिस्टम से जुड़े कुछ पार्ट्स बदले जा सकते हैं. इनमें फ्यूल पाइप, रबर होज, रबर सील, गैस्केट, O-Ring और रबर फिटिंग मिलती है.
  • ये सभी पार्ट्स सामान्य सर्विस के दौरान आसानी से बदले जा सकते हैं. इसके लिए इंजन खोलने या बड़ी मरम्मत की जरूरत नहीं होगी. सरकार ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से पुरानी गाड़ियों का इंजन अचानक खराब नहीं होगा.
  • कई टेस्टिंग में यह पाया गया है कि इंजन के टिकाऊपन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता. हालांकि, जिन गाड़ियों को E20 के लिए तैयार नहीं किया गया है, उनमें लंबे समय बाद कुछ रबर पार्ट्स घिस सकते हैं या खराब हो सकते हैं.

माइलेज और परफॉर्मेंस पर क्या असर पड़ेगा?

  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक, E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर कुछ पुरानी गाड़ियों में माइलेज में हल्की कमी आ सकती है. कुछ मामलों में इंजन की परफॉर्मेंस में भी मामूली अंतर महसूस हो सकता है. हालांकि, रोजाना ड्राइविंग में यह अंतर बहुत ज्यादा नहीं होता और ज्यादातर लोगों को बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता.

  • सरकार के मुताबिक, इस फ्यूल से पेट्रोल की खपत कम होगी. कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी और कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण में कमी आएगी. इसके अलावा एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को फायदा मिलेगा. देश को वैकल्पिक फ्यूल अपनाने में मदद मिलेगी और नई गाड़ियों के लिए कोई चिंता नहीं है.
  • आजकल लॉन्च होने वाली ज्यादातर नई पेट्रोल कारें और बाइक E20-रेडी बनाई जा रही हैं. यानी इनमें E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने के लिए किसी बदलाव की जरूरत नहीं होती. कार निर्माता कंपनियां पहले से ही ऐसे इंजन और फ्यूल सिस्टम तैयार कर रहे हैं जो E20 फ्यूल के साथ पूरी तरह काम कर सकें.

अगर आपके पास पुरानी गाड़ी है तो क्या करें?

  • अगर आपकी कार या बाइक BS-III पेट्रोल मॉडल है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. अगली सर्विस के दौरान सर्विस सेंटर पर फ्यूल सिस्टम की जांच जरूर कराएं. अगर फ्यूल पाइप, रबर होज, सील या गैस्केट में घिसावट दिखाई दे तो उन्हें बदलवा लें. इससे आपकी गाड़ी E20 पेट्रोल के साथ बेहतर तरीके से काम करेगी और भविष्य में किसी तरह की समस्या की आशंका कम हो जाएगी.

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