CNG Car Owner Complaints: भारत में एथेनॉल मिक्स पेट्रोल यानी E20 फ्यूल अब पूरी तरह से हर पंप पर मिलना अनिवार्य हो गया है. जिसके चलते अब आपको अपनी कार में एथेनॉल भरवाना ही पड़ेगा. हालांकि, एथेनॉल के आने के बाद से कई तरह के शिकायत सुनने को मिलें हैं. किसी का मानना है कि, माइलेज में कमी आ रही है जबकि किसी का कहना है कि, गाड़ी में अब पहले की तरह तेज नहीं भाग रही है.
इस बीच एक और मुद्दा सामने आ गया है. बता दें कि, अब सीएनजी कार मालिकों का मानना है कि, अब उनकी गाड़ियों के माइलेज में भी गिरावट आ रही है. तो चलिए समझते हैं यह पूरा मामला और जानतें हैं कि, क्यों सीएनजी गाड़ियों के मालिकों का ऐसा मानना है.
आफ्टर-मार्केट सीएनजी गाड़ियों को हो रहा है नुकसान
बता दें कि, सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जिन्होंने अपनी पेट्रोल गाड़ी में बाहर से यानी आफ्टर-मार्केट सीएनजी किट लगवाई है. ऐसा हम नहीं बल्कि दिल्ली में रहने वाले विनोद सिंह का मानना है. विनोद जी ने बातचीत में बताया कि, उनके पास 8 साल पुरानी गाड़ी है जिसमें 12 किलो का सिलेंडर लगा है. जिसमें तकरीबन 10 किलो गैस आती है.
उनका कहना है कि E20 पेट्रोल आने से पहले उनकी गाड़ी भारी ट्रैफिक में भी एक फुल सिलेंडर में आसानी से 150 किलोमीटर तक का सफर तय कर लेती थी. लेकिन अब जब से उन्होंने पेट्रोल टैंक में E20 फ्यूल भरवाया है तब से गाड़ी एक फुल सिलेंडर सीएनजी पर मुश्किल से 100 से 120 किलोमीटर ही चल पा रही है. पुराना इंजन होने के कारण एथेनॉल मिक्स पेट्रोल का सीधा असर गाड़ी के ओवरऑल कम्बशन साइकिल पर पड़ रहा है जिससे सीएनजी का माइलेज भी काफी गिर गया है.
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कंपनी-फिटेड सीएनजी कार के मालिक भी हैं परेशान
जानकारी दें दे कि, ऐसा बिल्कुल नहीं है कि यह दिक्कत केवल पुरानी या बाहर से किट लगवाने वाली गाड़ियों में ही आ रही है. हाल ही में कंपनी-फिटेड सीएनजी के साथ मारुति सुजुकी ब्रेजा खरीदने वाले एक दूसरे कार मालिक ने भी ऐसी ही शिकायत दर्ज की है. उनकी गाड़ी महज एक साल पुरानी है और उसमें 10 किलो का सिलेंडर है. जिसमें लगभग 8 किलो सीएनजी आती है.
उनका कहना है कि पहले के मुकाबले उनकी नई गाड़ी का माइलेज प्रति फुल टैंक पर करीब 20 किलोमीटर तक घट गया है. मॉडर्न इंजन होने के बावजूद, ईसीयू मैपिंग में जब E20 पेट्रोल के हिसाब से बदलाव होते हैं तो सीएनजी मोड पर चलते समय भी इंजन की ट्यूनिंग और एयर-फ्यूल रेशियो प्रभावित हो जाता है. जिससे माइलेज कम मिल रहा है.
इस लिए घट रहा है माइलेज
अब आतें हैं कि, सीएनजी गाड़ियों के माइलेज में क्यों कटौती हो रही है. तकनीकी रूप से समझें तो हर सीएनजी कार को स्टार्ट होने के लिए सबसे पहले पेट्रोल की ही जरूरत होती है और थोड़ी दूर चलने के बाद वह ऑटोमैटिक तरीके से सीएनजी पर शिफ्ट होती है. जब गाड़ी में E20 पेट्रोल डाला जाता है तो कार का ईसीयू एथेनॉल के कम एनर्जी आउटपुट को संभालने के लिए इंजन की टाइमिंग और ऑक्सीजन लेवल को एडजस्ट करता है.
ऐसा इस लिया है क्योंकि आधुनिक गाड़ियों का ईसीयू पेट्रोल और सीएनजी दोनों को एक ही सेंसर मैकेनिज्म से मॉनिटर करता है. इसलिए पेट्रोल के लिए बदली गई सेटिंग्स सीएनजी मोड पर चलते समय भी एक्टिव रहती हैं. इसी गलत कैलिब्रेशन और बार-बार पेट्रोल से सीएनजी पर स्विच होने के कारण गाड़ी गैस की भी ज्यादा खपत करने लगती है और मालिकों को कम माइलेज मिलता है.
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