राजधानी दिल्ली में प्राइवेट गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. दिल्ली में गाड़ियों की संख्या में 7.93 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ऐसे में सामने आया है कि अब दिल्ली में हर दूसरे शख्स के पास अपनी प्राइवेट गाड़ी है. आंकड़ों की मानें तो इस समय दिल्ली में 1000 लोगों पर 522 गाड़ियां हैं, जो कि पिछले वित्तीय वर्ष 484 थी. 

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न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा के मुताबिक, दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की ओर से आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट पेश की गई. इसमें बताया गया है कि साल 2025-26 में दिल्ली की सड़कों पर गाड़ियों की कुल संख्या बढ़कर 87.61 लाख पर पहुंच गई है.  यह पिछले साल की तुलना में 7.93 फीसदी की बढ़ोतरी है. वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा 81.18 लाख था.

इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन किया गया रद्द

रिपोर्ट के मुताबिक, 19 मार्च, 2026 तक प्रति एक हजार की आबादी पर वाहनों की संख्या 522 थी. पिछले वित्त वर्ष में रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या 81.18 लाख थी, जो अब बढ़कर लगभग 87.61 लाख हो गई है. दस साल से पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों पर लगे प्रतिबंध के तहत 19 मार्च, 2026 तक 66.20 लाख वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया.

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समीक्षा में कहा गया है कि सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दोपहिया वाहनों की श्रेणी में दर्ज की गई है. 19 मार्च तक 59,27,775 दोपहिया वाहन पंजीकृत थे, जो कुल वाहनों का 67.65 प्रतिशत है. 

पब्लिक ट्रांसपोर्ट का क्या हाल?

पब्लिक ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) शहर और एनसीआर की सबसे बड़ी इकाई है. मार्च, 2026 में डीटीसी के पास कुल 6,100 बसें थीं, जिनमें 1,002 बिना एसी वाली (सीएनजी) और 760 एसी वाली (सीएनजी) लो-फ्लोर बसें शामिल हैं. इसके अलावा, बेड़े में 2,750 एसी इलेक्ट्रिक (12 मीटर) और 1,588 एसी इलेक्ट्रिक (9 मीटर) बसें भी शामिल हैं. दिल्ली में प्रदूषण में गाड़ियों की बड़ी भूमिका मानी जाती है. अब सरकार इसी को देखते हुए बसों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रही है. 

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