पहले जब भी हम किसी ट्रिप पर जाते थे तो सबसे बड़ा डर यह रहता था की फोन कैसे चार्ज होगा. लेकिन अब जब भी हम अपनी गाड़ी से सफर पर निकलते हैं तो यह समस्या दूर हो जाती है. क्योंकि, गाड़ी में हम अपना फोन आराम से चार्ज कर सकते हैं. लंबे सफर के दौरान गूगल मैप्स के जरिए नेविगेशन चलाने, मनपसंद गाने सुनने या जरूरी बिजनेस कॉल्स अटेंड करने के लिए मोबाइल का फुल चार्ज रहना बेहद जरूरी भी लगता है. लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि कार में फोन चार्ज करने का आपका यह साधारण सा तरीका आपके महंगे स्मार्टफोन और आपकी कार दोनों के लिए बेहद भारी पड़ सकता है.

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अक्सर लोग बिना सोचे-समझे किसी भी सस्ते कार चार्जर का इस्तेमाल कर लेते हैं या फिर गलत समय पर फोन को प्लग-इन कर देते हैं. अगर आप भी रोजाना गाड़ी चलाते समय अपना मोबाइल चार्ज करते हैं तो आपको इससे जुड़े गंभीर खतरों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए. थोड़ी सी समझदारी और सही तरीका अपनाकर आप अपने फोन और गाड़ी दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं. चलिए जानतें कैसे?

लो-क्वालिटी एडॉप्टर का न करें इस्तेमाल

आपको बता दें कि, कार में फोन चार्ज करते समय की जाने वाली सबसे बड़ी गलती लोकल या बिना ब्रांड वाले सस्ते कार चार्जर का इस्तेमाल करना है. लोकल चार्जर में सही पावर रेगुलेशन सर्किट नहीं होता है जिसकी वजह से फोन में अचानक जरूरत से ज्यादा या बहुत कम करंट पहुंचने लगता है.

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जबकि इसके अलावा सही एम्पीयर न मिलने के कारण फोन बहुत धीमी गति से चार्ज होता है और केबल भी तेजी से गर्म होने लगती है. सस्ते अडैप्टर आपकी कार के फ्यूज को भी उड़ा सकते हैं. ऐसे में हमेशा अपनी कंपनी का ओरिजिनल या किसी नामी ब्रांड का ही सर्टिफाइड एडॉप्टर इस्तेमाल करना चाहिए.

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इंजन स्टार्ट करने से पहले फोन चार्ज में न लगाएं

बहुत से लोगों की यह आदत होती है कि वे कार में बैठते ही सबसे पहले फोन को चार्जर से कनेक्ट कर देते हैं और उसके बाद गाड़ी का इग्निशन ऑन करते हैं. जब आप कार के इंजन को सेल्फ देकर स्टार्ट करते हैं तो उस वक्त कार की बैटरी से एक बहुत बड़ा इलेक्ट्रिकल स्पाइक यानी बिजली का तेज झटका निकलता है.

यह अचानक बढ़ा हुआ वोल्टेज आपके फोन के नाजुक मदरबोर्ड और चार्जिंग आईसी को पूरी तरह से जलाकर तबाह कर सकता है. इसलिए हमेशा गाड़ी स्टार्ट होने और इंजन स्मूथ चलने के बाद ही फोन को केबल से जोड़ें.

रहता है ओवरहीटिंग का खतरा

ऐसा देखा जाता है कि, सफर के दौरान लोग फोन को कार के डैशबोर्ड पर या ऐसी जगह रख देते हैं जहां सीधी धूप आ रही होती है. चार्जिंग के दौरान फोन की बैटरी में केमिकल रिएक्शन होता है. जिससे वह पहले से ही गर्म होता है.

ऐसे में अगर उस पर सीधी धूप और बाहर की गर्मी भी पड़ती रहे तो फोन का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है. अत्यधिक गर्मी के कारण फोन की बैटरी फूल सकती है उसकी लाइफ आधी हो सकती है और कई मामलों में तो फोन में ब्लास्ट होने तक का खतरा पैदा हो जाता है.

बंद गाड़ी में चार्जिंग पोर्ट का इस्तेमाल

आपको बता दें कि, जब आपकी कार का इंजन पूरी तरह से बंद होता है तब भी कई पुरानी या नई गाड़ियों के 12V पावर सॉकेट में बैटरी से बिजली की सप्लाई चालू रहती है. अगर आप कार बंद करके लंबे समय तक फोन को चार्जिंग पर छोड़े रखते हैं. तो फोन कार की मेन बैटरी से पावर खींचता रहता है.

इससे कार की बैटरी तेजी से डिस्चार्ज हो जाती है और जब आप बाद में सफर पर निकलते हैं गाड़ी स्टार्ट करते हैं तो कार स्टार्ट ही नहीं होगी. इसलिए सफर खत्म होते ही फोन को तुरंत सॉकेट से निकाल देना चाहिए.

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