हमारे देश में जबसे सीएनजी गाड़ियां आना शुरू हुईं हैं उसके बाद से जिन लोगों को काम खर्च में ज्यादा माइलेज चाहिए होता है वह सीएनजी गाड़ी ही खरीदते हैं. जिसके चलते हर साल इंडिया में सीएनजी गाड़ियों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है. लेकिन कुछ लोगों को देखा गया है कि, पैसों की अधिक बचत करने के चक्कर में एक ऐसी गंभीर अनजाने में गलती कर बैठते हैं. जो बाद में उनके इंजन को पूरी तरह तबाह कर देती है और जेब पर हजारों रुपये का भारी फटका लगाती है.

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ऐसा इस लिए है क्योंकि, कई कार मालिक सीएनजी टैंक फुल करवा लेते हैं लेकिन कार के पेट्रोल टैंक को पूरी तरह से सूखा यानी खाली छोड़ देते हैं या फिर उसमें नाममात्र का पेट्रोल रखते हैं. लोगों को लगता है कि जब गाड़ी सीएनजी पर ही चलनी है तो पेट्रोल में पैसे फंसाने का क्या फायदा. अगर आप भी यही सोचते हैं और सीएनजी गाड़ी चला रहे हैं तो थोड़ा सावधान हो जाइए. चलिए जानतें हैं खाली पेट्रोल टैंक आपकी कार के इंजन और पार्ट्स को कैसे नुकसान पहुंचाता है और इससे बचने के आसान उपाय क्या हैं.

फ्यूल पंप हो जाता है खराब

आपको बता दें कि, आजकल की सीएनजी गाड़ियों में फ्यूल पंप हमेशा चालू रहता है चाहे गाड़ी सीएनजी मोड पर चल रही हो या पेट्रोल मोड पर. इस फ्यूल पंप को ठंडा रखने और उसमें लुब्रिकेशन बनाए रखने का काम खुद पेट्रोल ही करता है. जब आपकी कार के टैंक में पेट्रोल नहीं होता या उसका लेवल बहुत कम होता है तो फ्यूल पंप हवा खींचने लगता है और बहुत तेजी से गर्म होने लगता है.

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बिना लुब्रिकेशन के चलने के कारण फ्यूल पंप बहुत जल्द जल जाता है या पूरी तरह जाम हो जाता है. एक बार फ्यूल पंप खराब होने पर उसे बदलवाने में 5,000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक का भारी-भरकम खर्च आता है.

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इन पार्ट्स को भी पहुंचता है नुकसान

जबकि इसके अलावा सीएनजी एक सूखी गैस होती है. जिसमें पेट्रोल की तरह कोई प्राकृतिक चिकनाई या नमी नहीं होती. जब कार लगातार केवल सीएनजी पर ही चलती रहती है तो इंजन के वाल्व्स, पिस्टन और फ्यूल इंजेक्टर्स में बहुत ज्यादा सूखापन आ जाता है.

जिसके चलते इंजन के पार्ट्स आपस में रगड़ खाने लगते हैं और बहुत तेजी से घिसने लगते हैं. लंबे समय तक पेट्रोल का इस्तेमाल न करने से फ्यूल इंजेक्टर्स में कचरा या कार्बन जम जाता है. जिससे वे ब्लॉक हो जाते हैं. इसके बाद जब आप कभी मजबूरी में कार को पेट्रोल पर शुरू करने की कोशिश करते हैं. तो गाड़ी स्टार्ट ही नहीं होती या झटके लेने लगती है.

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पेट्रोल पर गाड़ी स्टार्ट करना क्यों है जरूरी?

जानकारी दें दे कि, सीएनजी कार की लंबी उम्र और बेहतर परफॉर्मेंस के लिए एक गोल्डन रूल हमेशा ध्यान रखना चाहिए. गाड़ी को हमेशा पेट्रोल मोड पर ही स्टार्ट करें. जब आप ठंडी गाड़ी को स्टार्ट करते हैं तो पेट्रोल इंजन के अंदरूनी पार्ट्स तक पहुंचकर उन्हें तुरंत लुब्रिकेट कर देता है और सही ऑपरेटिंग टेम्प्रेचर तक पहुंचा देता है.

1 से 2 किलोमीटर चलाने के बाद जब इंजन गर्म हो जाए तब गाड़ी को सीएनजी पर स्विच करना चाहिए. ऐसा करने से इंजन के पिस्टन और वाल्व्स सुरक्षित रहते हैं. वहीं, कार स्टार्ट होने में कभी दिक्कत नहीं देती और इंजन की ओवरऑल लाइफ सालों-साल तक बनी रहती है.

कैसे करें बचाव?

आप इस भारी नुकसान से बचने के लिए अपनी सीएनजी कार के पेट्रोल टैंक में हमेशा कम से कम 25% से 30% पेट्रोल हमेशा बनाकर रखें. केवल पेट्रोल रखना ही काफी नहीं है बल्कि हर हफ्ते अपनी गाड़ी को 10 से 15 किलोमीटर सिर्फ पेट्रोल पर जरूर चलाएं ताकि पेट्रोल लाइन में ताजा ईंधन बहता रहे और इंजेक्टर्स साफ रहें.

इसके अलावा सीएनजी कार के स्पार्क प्लग और एयर फिल्टर की नियमित सफाई करवाएं. क्योंकि गंदे एयर फिल्टर से सीएनजी का माइलेज गिर जाता है. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी कार को बड़े ब्रेकडाउन से बचा सकते हैं और बिना किसी टेंशन के सफर कर सकते हैं.

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