दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को कम करने और साफ यातायात को बढ़ावा देने के लिए सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर दे रही है. इसी दिशा में दिल्ली सरकार एक नई ड्राफ्ट इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी तैयार कर रही है. इस पॉलिसी का मकसद यह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग पेट्रोल, डीजल और CNG गाड़ियों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन खरीदें. इसके लिए सरकार EV पर खास इंसेंटिव देने की तैयारी में है और साथ ही पेट्रोल-सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों पर Extra सेस लगाने पर भी विचार किया जा रहा है.
पेट्रोल और CNG कारें क्यों हो सकती हैं महंगी
- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नई ड्राफ्ट पॉलिसी में पेट्रोल और CNG कारों पर 1 से 2 प्रतिशत तक सेस लगाने का प्रस्ताव है. अभी दिल्ली में केवल डीजल कारों पर 1 प्रतिशत ग्रीन सेस लगता है, जिसे बढ़ाकर 2 प्रतिशत किया जा सकता है. अगर यह नियम लागू होता है, तो नई पेट्रोल और CNG गाड़ियों की ऑन-रोड कीमत बढ़ जाएगी. इससे आम लोगों के लिए ये गाड़ियां थोड़ी महंगी हो सकती हैं और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत के मुकाबले अंतर कम हो जाएगा.
EV को बढ़ावा देने के लिए क्या फायदे मिल सकते हैं?
- सरकार चाहती है कि दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़े. VAHAN डेटा के अनुसार, अभी हर महीने रजिस्टर होने वाले वाहनों में EV की हिस्सेदारी करीब 12 से 14 प्रतिशत है. सरकार का लक्ष्य इसे और आगे ले जाना है. इसके लिए रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट, बैटरी क्षमता के हिसाब से सब्सिडी, कम ब्याज पर EV लोन, पुरानी गाड़ी स्क्रैप करने पर इंसेंटिव और चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने जैसे कदम शामिल किए जा सकते हैं.
कब लागू हो सकती है यह पॉलिसी?
- यह ड्राफ्ट EV पॉलिसी जल्द ही जनता और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के सुझाव के लिए जारी की जाएगी. इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर इसे लागू किया जाएगा, जिसकी उम्मीद मार्च 2026 तक की जा रही है. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल सेस बढ़ाने से बड़ा बदलाव नहीं आएगा, लेकिन सही इंसेंटिव मिलने पर लोग EV की ओर जरूर बढ़ेंगे.
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