आने वाले महीनों में कार खरीदना महंगा हो सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह ऑटोमोबाइल कंपनियों के सामने बढ़ती लागत है. मार्च 2026 से स्टील, मेटल और प्लास्टिक जैसे जरूरी कच्चे माल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इसका सीधा असर कंपनियों के खर्च और मुनाफे पर पड़ रहा है. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों से भी यह साफ हुआ है कि इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ता जा रहा है. अगर यही स्थिति बनी रही तो कंपनियां अपने नुकसान को कम करने के लिए गाड़ियों के दाम बढ़ा सकती हैं, जिससे ग्राहकों की जेब पर असर पड़ेगा.

Continues below advertisement

पश्चिम एशिया में तनाव का असर

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर अब ऑटो सेक्टर पर भी दिखने लगा है. रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में स्टील की कीमत करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 60,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है. वहीं स्टेनलेस स्टील भी काफी महंगा हो गया है. इससे गाड़ियों की बॉडी और दूसरे पार्ट्स बनाने की लागत बढ़ गई है. जब कंपनियों का खर्च बढ़ता है, तो उसका असर आखिर में ग्राहक पर ही पड़ता है.

कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल

सिर्फ स्टील ही नहीं, बल्कि दूसरे कच्चे माल की कीमतों में भी बड़ा उछाल देखा गया है. स्टील बनाने में काम आने वाला कोकिंग कोल 31 प्रतिशत तक महंगा हो गया है. एल्युमीनियम और कॉपर के दाम भी तेजी से बढ़े हैं. इसके अलावा, गाड़ियों के अंदर इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के दाम भी काफी बढ़ गए हैं. पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीकार्बोनेट जैसे मटेरियल अब पहले से ज्यादा महंगे हो चुके हैं. इन सभी चीजों का सीधा असर कार की कुल लागत पर पड़ता है.

Continues below advertisement

महंगी धातुओं से बढ़ी एमिशन सिस्टम की लागत

गाड़ियों में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए कुछ खास धातुओं का इस्तेमाल होता है, जिनकी कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है. प्लैटिनम, रोडियम और पैलेडियम जैसे मटेरियल अब काफी महंगे हो चुके हैं. इससे गाड़ियों में लगने वाले एमिशन सिस्टम की लागत भी बढ़ गई है. कंपनियों के लिए यह एक और बड़ी चुनौती बन गई है.

यह भी पढ़ें:-

फुल टैंक में चलेगी 1000 KM, एडवांस फीचर्स के साथ जल्द लॉन्च होगी Honda ZR-V, जानें राइवल्स 

 


Car loan Information:

Calculate Car Loan EMI