गाड़ी कोई भी हो, टायर में सही हवा होना बहुत जरूरी है. कम हवा से टायर जल्दी घिसते हैं और माइलेज गिरता है, जबकि ज्यादा हवा से पकड़ कमजोर पड़ती है. यहां किसी एक कार या कंपनी की बात नहीं हो रही है. यह सभी कारों के लिए आम जानकारी है. इसे कोई भी कार वाला अपना सकता है. तो आइए समझें कि अलग-अलग सेगमेंट की कारों में आमतौर पर कितना प्रेशर रखा जाता है और सही आंकड़ा कहां से मिलता है.
अलग-अलग सेगमेंट में आमतौर पर कितना प्रेशर
टायर प्रेशर को PSI में नापा जाता है. यहां दी गई रेंज किसी खास कार या कंपनी की नहीं, सभी कारों के लिए एक मोटा अंदाजा है. छोटी शहरी कारों में आमतौर पर करीब 30 से 32 PSI रखा जाता है. मिड-साइज सेडान में यह करीब 32 से 35 PSI होता है. एसयूवी, क्रॉसओवर और MPV जैसी भारी गाड़ियों में यह करीब 34 से 38 PSI तक जाता है. असल आंकड़ा हर मॉडल का अलग होता है. कई बार आगे और पीछे के टायरों के लिए भी अलग आंकड़ा तय किया जाता है.
अपनी कार का सही आंकड़ा कहां देखें
सबसे पक्का आंकड़ा आपकी कार पर ही लिखा होता है. ड्राइवर की तरफ के दरवाजे के किनारे एक स्टिकर लगा होता है, जिसमें सही प्रेशर लिखा रहता है. यह फ्यूल टैंक के ढक्कन के अंदर या गाड़ी की मैनुअल बुक में भी मिल सकता है. एक बात का खास ख्याल रखें. टायर की साइड पर जो ज्यादा संख्या लिखी होती है, वह टायर के लिए अधिकतम सीमा होती है, भरवाने वाला प्रेशर नहीं. उसके हिसाब से हवा न भरवाएं.
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कब और कैसे चेक करें हवा
प्रेशर हमेशा ठंडे टायरों में नापें. यानी गाड़ी करीब तीन घंटे खड़ी रही हो या दो किलोमीटर से कम चली हो. गाड़ी चलने के बाद टायर गर्म होते हैं और प्रेशर बढ़ जाता है. ऐसे में नापकर हवा निकालना गलत है, क्योंकि ठंडे होने पर प्रेशर कम पड़ जाएगा. महीने में एक बार चारों टायरों के साथ स्टेपनी भी चेक करें. सर्दियों में प्रेशर थोड़ा गिर जाता है, इसलिए मौसम बदलने पर जांच जरूर करें.
लोड और सफर के हिसाब से क्या बदलें
अगर गाड़ी में पूरे परिवार के साथ ज्यादा सामान है या लंबा सफर करना है, तो प्रेशर कंपनी के बताए आंकड़े के मुताबिक थोड़ा बढ़ाना पड़ता है. मैनुअल में अक्सर पूरे लोड के लिए अलग आंकड़ा दिया होता है. आमतौर पर यह बढ़ोतरी 2 से 3 PSI के आसपास रहती है, पर मैनुअल का आंकड़ा सबसे भरोसेमंद है. बहुत कम या बहुत ज्यादा प्रेशर दोनों नुकसान करते हैं. कम हवा में टायर गर्म होकर खराब होता है. ज्यादा हवा में पकड़ कमजोर पड़ती है और झटके ज्यादा लगते हैं.
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