आज के समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे में हर कार मालिक चाहता है कि उसकी कार कम फ्यूल में ज्यादा दूरी तय करे. लेकिन माइलेज को लेकर लोगों के मन में कई तरह की गलतफहमियां होती हैं. कुछ लोग सोचते हैं कि बहुत धीरे कार चलाने से माइलेज बढ़ता है, जबकि कुछ का मानना है कि तेज रफ्तार में गाड़ी ज्यादा किफायती होती है. असलियत यह है कि इन दोनों के बीच एक सही स्पीड होती है, जिस पर कार सबसे अच्छा माइलेज देती है. सही रफ्तार और सही ड्राइविंग स्टाइल अपनाकर आप अपनी कार की फ्यूल एफिशिएंसी को काफी हद तक सुधार सकते हैं.
माइलेज के लिए कौन-सी स्पीड सबसे सही?
- ज्यादातर पेट्रोल और डीजल कारों के लिए 70 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड को सबसे बैलेंस माना जाता है. हाईवे पर जब कार टॉप गियर में 70–80 किमी/घंटा की रफ्तार से चलती है, तो इंजन पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और फ्यूल की खपत नियंत्रित रहती है. इसी वजह से इस स्पीड रेंज में कार अपने बेस्ट माइलेज के करीब पहुंच जाती है. शहर में ट्रैफिक, सिग्नल और बार-बार रुकने की वजह से तेज स्पीड संभव नहीं होती. ऐसे में 40 से 50 किमी/घंटा की स्मूद और स्थिर ड्राइविंग ज्यादा फायदेमंद रहती है.
माइलेज खराब करने वाली गलतियां
- बहुत तेज स्पीड पर कार चलाने से इंजन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. 100 किमी/घंटा से ऊपर की रफ्तार पर हवा का दबाव भी बढ़ जाता है, जिससे फ्यूल तेजी से खर्च होता है. इसके अलावा गलत गियर में गाड़ी चलाना भी माइलेज को नुकसान पहुंचाता है. बार-बार ब्रेक लगाना और अचानक एक्सीलेटर दबाना, जिसे रैश ड्राइविंग कहा जाता है, फ्यूल की सबसे बड़ी बर्बादी है.
माइलेज बढ़ाने के असरदार तरीके
- हाईवे पर अगर आपकी कार में क्रूज कंट्रोल है, तो उसका इस्तेमाल जरूर करें. इससे एक जैसी स्पीड बनी रहती है और माइलेज बेहतर मिलता है. टायरों में हमेशा सही हवा रखें, क्योंकि कम हवा वाले टायर ज्यादा फ्रिक्शन जनरेट करते हैं. एसी का इस्तेमाल भी समझदारी से करें ताकि फ्यूल की बचत हो सके.
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