गर्मी बढ़ते ही लोग अपनी कार को धूप से बचाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने लगते हैं.कोई विंडो सनशेड लगाता है तो कोई टिंटेड फिल्म का इस्तेमाल करता है ताकि कार का केबिन ठंडा रहे और अंदर बैठने वालों को तेज धूप से राहत मिले. बहुत कम लोगों को पता होता है कि कार की खिड़कियों पर लगाए गए ऐसे सनशेड या कवर कई बार ट्रैफिक नियमों के खिलाफ भी हो सकते हैं और इसके कारण चालान तक कट सकता है.
आसान भाषा में कहें तो कार विंडो सनशेड वह कवर होता है जिसे कार की खिड़कियों या विंडशील्ड पर लगाया जाता है ताकि धूप और UV किरणें कम अंदर आएं.इससे कार का इंटीरियर कम गर्म होता है और सफर थोड़ा आरामदायक बन जाता है.बाजार में यह अलग-अलग मटेरियल जैसे नेट, नायलॉन, फॉइल या मैग्नेटिक शेड के रूप में मिलता है.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था फैसला
भारत में कानून कहता है कि कार के शीशों पर ऐसी कोई भी चीज नहीं लगाई जा सकती जो बाहर से अंदर की विजिबिलिटी कम करे.सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में एक अहम फैसला देते हुए कहा था कि कारों में ब्लैक फिल्म, गहरे टिंट, पर्दे या ऐसा कोई भी मटेरियल नहीं लगाया जा सकता जो रोशनी को रोकता हो या अंदर देखने में दिक्कत पैदा करता हो.कोर्ट का मानना था कि इससे सड़क की सेफ्टी प्रभावित होती है और क्रिमिनल्स को भी फायदा मिल सकता है.
गाड़ियों के लिए तय नियमों के मुताबिक फ्रंट और रियर विंडशील्ड में कम से कम 70 फीसदी Visual Light Transmission (VLT) होना जरूरी है, यानी शीशे से पर्याप्त रोशनी अंदर जानी चाहिए.वहीं साइड विंडो के लिए कम से कम 50 फीसदी VLT जरूरी है. आसान शब्दों में कहें तो कार के शीशे इतने काले या ढके हुए नहीं होने चाहिए कि बाहर से अंदर साफ दिखाई ही न दे.
पुलिस कर सकती है कार्रवाई
कई लोगों को यह भ्रम रहता है कि हल्के सनशेड या मैग्नेटिक शेड लगाना पूरी तरह कानूनी है, लेकिन असल में ऐसा कोई भी शेड ड्राइवर की विजिबिलिटी कम करता है तो पुलिस कार्रवाई कर सकती है. यही वजह है कि कई शहरों में ट्रैफिक पुलिस ऐसे मामलों में चालान काटती है.सोशल मीडिया और Reddit पर भी कई लोगों ने बताया कि उन्हें रियर सनब्लाइंड या सनशेड लगाने पर जुर्माना भरना पड़ा।
कुछ लग्जरी कारों में कंपनी की तरफ से इनबिल्ट रोल-अप सनशेड दिए जाते हैं. आमतौर पर इन्हें कानूनी माना जाता है क्योंकि वाहन निर्माता इन्हें VLT नियमों के हिसाब से डिजाइन करते हैं और इन्हें RTO अप्रूवल भी मिलता है.लेकिन यदि इनसे भी विजिबिलिटी प्रभावित होती है तो पुलिस कार्रवाई संभव है.
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