Car Low Fuel Warning: गाड़ी चलाते समय जब डैशबोर्ड पर पीली या लाल फ्यूल लाइट जल उठती है, तो दिल की धड़कन थोड़ी तेज हो ही जाती है. ऐसे में सबके मन में एक ही सवाल घूमता है कि अब गाड़ी कितनी दूर तक चलेगी. यही टेंशन बाइक चलाने वालों को भी होती है, जब बाइक अचानक झटका देकर रिजर्व पर आ जाती है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
कार की लो फ्यूल वॉर्निंग कितनी दूर तक चलती है?
असल में यह लो फ्यूल वॉर्निंग और रिजर्व दोनों ही एक तरह की सेफ्टी व्यवस्था हैं, जो आपको बिना पेट्रोल खत्म हुए आगे का इंतजाम करने का आखिरी मौका देती हैं. लेकिन दोनों में फर्क यह है कि यह चेतावनी कितनी दूर तक आपका साथ निभाती है. ऐसे में आपको बता दें कि, आमतौर पर जब कार में लो फ्यूल वॉर्निंग लाइट जलती है, तो इसका मतलब है कि टैंक में करीब 10 से 15 प्रतिशत फ्यूल बचा हुआ है. साथ ही माइलेज के हिसाब से देखा जाए तो यह फ्यूल आमतौर पर 40 से 80 किलोमीटर तक गाड़ी को आराम से चला सकता है.
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बाइक का रिजर्व मोड और असली फर्क
अब बात करते हैं बाइक की, जिसमें फ्यूल इंडिकेटर की जगह ज्यादातर मॉडल्स में रिजर्व पेट्रोल रिजर्व मोड दिया जाता है. जब बाइक का मेन फ्यूल खत्म हो जाता है और गाड़ी झटका देने लगती है. आमतौर पर बाइक के रिजर्व टैंक में करीब 1 से 1.5 लीटर पेट्रोल बचा होता है, जो माइलेज के हिसाब से लगभग 20 से 30 किलोमीटर तक चल जाता है. यानी अगर सीधी तुलना करें, तो कार की लो फ्यूल वॉर्निंग के बाद मिलने वाली रेंज, बाइक के रिजर्व से आमतौर पर ज्यादा होती है, क्योंकि कार का टैंक बड़ा होता है और उसमें बची फ्यूल की मात्रा भी ज्यादा होती है. लेकिन ध्यान रखें वाली बात ये है कि जैसे ही वॉर्निंग लाइट जले या बाइक रिजर्व पर आए, सबसे नजदीकी पेट्रोल पंप की तरफ बढ़ जाना ही समझदारी है.
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