Car Loan EMI Default Rights: भारत में आजकल कार खरीदना बेहद ही आसान हो गया है. क्योंकि, बैंक के द्वारा आपको तुरंत लोन मिल जाता है और आसान EMI पर लोग गाड़ी निकाल रहे हैं. हालांकि, लोन कुछ ही लोग भर पाते हैं. क्योंकि, कभी-कभी नौकरी छूटने, बिजनेस में घाटा होने या किसी मेडिकल इमरजेंसी की वजह से लोन की किस्त यानी EMI टाइम पर जमा नहीं हो पाती. ऐसी स्थिति में अक्सर लोग डर जाते हैं कि बैंक या फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट्स आकर उनकी गाड़ी जबरदस्ती उठा ले जाएंगे या उनके साथ बदतमीजी करेंगे. 

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अगर आपके मन में भी ऐसा कोई डर है तो घबराये नहीं और चैन की सांस लीजिए. RBI के सख्त नियमों के मुताबिक लोन डिफॉल्ट होने की स्थिति में भी आपके पास कई कानूनी अधिकार होते हैं. कोई भी बैंक या लेंडर अपनी मर्जी से दादागिरी करके आपकी कार नहीं छीन सकता. तो चलिए जानतें हैं अगर ऐसा कभी होता है तो इससे कैसे बचा जा सकता है.

बैंक को देने होंगे ये जरूरी नोटिस

अगर आपने कार लोन लेकर गाड़ी खरीद चुकें हैं और अगर आपकी एक या दो EMI मिस हो जाती हैं. तो इस बैंक सीधे आपकी गाड़ी जब्त नहीं कर सकता. लेंडर को सबसे पहले आपको एक ऑफिशियल डिमांड नोटिस भेजना होगा जिसमें बकाया राशि चुकाने के लिए 60 दिनों का समय दिया जाता है. अगर आप इस अवधि में भी भुगतान नहीं कर पाते तो बैंक आपकी गाड़ी को अपने कब्जे में लेने का इरादा जताते हुए एक 'प्री-पजेशन' नोटिस जारी करेगा. 

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इसके बाद भी आपको अपनी बात रखने और पैसे का इंतजाम करने का पूरा मौका मिलता है. इन तय कानूनी प्रक्रियाओं और नोटिस के बिना गाड़ी उठाना पूरी तरह से गैर-कानूनी माना जाता है. 

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गुंडागर्दी पर RBI के हैं सख्त नियम

अक्सर आपने देखा होगा कि बैंक के रिकवरी एजेंट्स लोन डिफॉल्टर्स को डराने-धमकाने लगते हैं. लेकिन आरबीआई की गाइडलाइंस कहती हैं कि कोई भी रिकवरी एजेंट सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद आपको कॉल या विजिट नहीं कर सकता. इसके अलावा वे आपके साथ किसी भी तरह की गाली-गलौज, हाथापाई या मानसिक प्रताड़ना नहीं कर सकते. 

जब भी कोई एजेंट आपके घर आए तो आपको उससे उसका आईडी कार्ड और बैंक का अथॉराइजेशन लेटर मांगने का पूरा हक है. अगर कोई एजेंट जबरदस्ती कार की चाबी छीनने की कोशिश करता है तो आप तुरंत पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

खत्म नहीं होते आपके अधिकार

अगर मान लीजिए कि सारे नोटिस के बाद भी किसी मज़बूरी के चलते आप पैसे नहीं चुका पाए और बैंक ने गाड़ी अपने कब्जे में ले ली. तब भी आपके अधिकार खत्म नहीं होते. गाड़ी बेचने से पहले बैंक आपको एक 'प्री-सेल' नोटिस भेजेगा. इसमें आपको आखिरी मौका दिया जाता है कि आप बकाया राशि चुकाकर अपनी कार वापस ले लें. 

अगर बैंक गाड़ी की नीलामी करता है, तो उसकी सही वैल्यू लगानी होगी. नीलामी से जो पैसा मिलेगा उससे आपका लोन चुकता किया जाएगा. अगर कार आपकी लोन राशि से ज्यादा कीमत में बिकती है तो बची हुई एक्स्ट्रा रकम बैंक को आपको वापस लौटानी होगी.

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