गर्मियों में कार का सबसे बड़ा दुश्मन तेज धूप होती है. कई बार कार इतनी गर्म हो जाती है कि उसमें बैठना मुश्किल हो जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी कार का कलर भी इस गर्मी को कम या ज्यादा करने में बहुत बड़ा रोल निभाता है? आइए जानते हैं कि कार का कलर इतना ज्यादा जरूरी क्यों है?
गहरे रंग की तुलना में हल्के रंग जैसे सफेद, सिल्वर या हल्का ग्रे, सूरज की किरणों को ज्यादा मात्रा में वापस कर देते हैं. इसका मतलब है कि ये रंग धूप की गर्मी को कम सोखते हैं, जिससे कार जल्दी गर्म नहीं होती. वहीं दूसरी ओर काले या गहरे रंग जैसे ब्लैक, डार्क ब्लू आदि ज्यादा गर्मी को अपने अंदर खींच लेते हैं, जिससे कार का बाहरी हिस्सा और अंदर का केबिन जल्दी गर्म हो जाता है.
किस कलर की कार रहती है बेस्ट?
इसी वजह से गर्म इलाकों में सफेद रंग की कारें ज्यादा पसंद की जाती हैं. सफेद कलर लगभग 80 से 90 फीसदी तक सूरज की रोशनी को वापस लौटा सकता है, जिससे कार का तापमान कम रहता है. नई तकनीक की बात की जाए, जिसे कूल पेंट या हीट-रिफ्लेक्टिव पेंट कहा जाता है. यह एक खास तरह का पेंट होता है जो सिर्फ कलर के भरोसे नहीं बल्कि तकनीक की मदद से गर्मी को कम करता है.
यह पेंट सूरज की किरणों (खासकर इंफ्रारेड और UV किरणों) को वापस भेज देता है, जिससे कार कम गर्म होती है. नई तकनीक वाले कूल पेंट से कार की बाहरी सतह का तापमान लगभग 12°C तक कम हो सकता है और अंदर का तापमान करीब 5°C तक कम हो सकता है.
कारों में भी बढ़ रहा इस्तेमाल
यह पेंट सिर्फ गर्मी कम करने में ही मदद नहीं करता, बल्कि इससे AC का इस्तेमाल भी कम करना पड़ता है. इसका मतलब है कि पेट्रोल या बैटरी की खपत भी कम होती है और गाड़ी ज्यादा एफिशिएंट बनती है. इसके अलावा कुछ खास हीट रिफ्लेक्टिव पेंट भी आते हैं जो सूरज की गर्मी को सोखने के बजाय उसे वापस परावर्तित (reflect) कर देते हैं. ये पेंट आमतौर पर इमारतों और छतों पर इस्तेमाल होते हैं, लेकिन अब कारों में भी इनका इस्तेमाल बढ़ रहा है. ये पेंट UV और इंफ्रारेड किरणों को रोककर सतह का तापमान कम करते हैं.
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