पुरानी कार खरीदते समय सबसे बड़ा डर यही रहता है कि कहीं गाड़ी पहले किसी बड़े एक्सीडेंट का शिकार तो नहीं हुई. कई बार लोग कार की असली हालत छिपाकर उसे बेच देते हैं. ऐसे में थोड़ी सावधानी और सही जांच करके आप बड़ी परेशानी से बच सकते हैं. कुछ बातों पर ध्यान देकर यह पता लगाया जा सकता है कि कार पहले एक्सीडेंट में शामिल रही है या नहीं. आइए विस्तार से जानते हैं.
बॉडी के गैप्स ध्यान से देखें
कंपनी से बनी नई कार में बोनट, दरवाजों और डिग्गी के बीच का गैप हर जगह बराबर होता है. अगर किसी हिस्से में गैप ज्यादा या कम दिख रहा है या दरवाजा ठीक से बंद नहीं हो रहा है, तो यह संकेत हो सकता है कि उस हिस्से की मरम्मत की गई है. कई बार एक्सीडेंट के बाद बॉडी पार्ट बदल दिए जाते हैं, जिससे फिटिंग पहले जैसी नहीं रहती.
पेंट की जांच भी बहुत जरूरी
कार के पेंट को ध्यान से देखने पर भी कई बातें पता चल सकती हैं. अगर किसी हिस्से का रंग या चमक बाकी बॉडी से अलग दिख रही है, तो समझिए कि उसे दोबारा पेंट किया गया है. रबर की लाइन या किनारों पर पेंट के निशान दिखना भी मरम्मत का संकेत हो सकता है. कंपनी का ओरिजिनल पेंट आमतौर पर स्मूद होता है, जबकि बाद में किया गया पेंट थोड़ा खुरदरा महसूस हो सकता है.
बोनट और अंदरूनी हिस्से जरूर देखें
बोनट खोलकर बोल्ट्स और कब्जों को ध्यान से देखें. अगर उन पर औजारों के निशान हैं या पेंट निकला हुआ है, तो इसका मतलब है कि उस हिस्से को खोला गया था. इंजन के आसपास और डिग्गी के अंदर वेल्डिंग के निशान या मुड़ा हुआ लोहा दिखे तो कार को पहले बड़ा नुकसान हो चुका हो सकता है.
टेस्ट ड्राइव लेना न भूलें
कार खरीदने से पहले उसकी टेस्ट ड्राइव जरूर करें. ड्राइव करते समय इंजन की आवाज, कंपन और स्टेयरिंग की स्थिति पर ध्यान दें. तेज स्पीड में अगर कार असामान्य आवाज करे या एक तरफ खिंचे, तो गाड़ी में दिक्कत हो सकती है.
शीशे और रिकॉर्ड भी करें चेक
कार के सभी शीशों पर मैन्युफैक्चरिंग डेट लिखी होती है. अगर किसी एक शीशे की तारीख अलग है, तो वह बदला गया हो सकता है. इसी तरह नई हेडलाइट भी एक्सीडेंट का संकेत हो सकती है. साथ ही सर्विस रिकॉर्ड और इंश्योरेंस क्लेम जरूर देखें.
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