Car Buying Tips: नई कार खरीदना हर किसी के लिए एक खास पल होता है. लेकिन अक्सर उत्साह में लोग ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनका नुकसान बाद में लंबे समय तक उठाना पड़ता है. शोरूम में चमचमाती कारें, आकर्षक ऑफर और सेल्स एग्जीक्यूटिव की बातें कई बार खरीदार का ध्यान जरूरी चीजों से हटा देती हैं. खासकर पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहक जल्दबाजी में फैसला कर लेते हैं. 

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विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ कार का डिजाइन या कीमत देखकर फैसला लेना सही नहीं होता. कार खरीदने से पहले उसकी सेफ्टी, माइलेज, मेंटेनेंस कॉस्ट और आपकी जरूरतों का सही आकलन करना जरूरी है. कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि बिना रिसर्च और टेस्ट ड्राइव के कार खरीदना बाद में पछतावे की वजह बन सकता है. इसलिए शोरूम पहुंचने से पहले पूरी तैयारी करना बेहद जरूरी है.

सिर्फ सेल्समैन की बातों पर भरोसा करना पड़ सकता है भारी

कार खरीदते समय सबसे बड़ी गलती यह होती है कि ग्राहक पूरी तरह सेल्समैन की सलाह पर निर्भर हो जाते हैं. शोरूम का मकसद कार बेचना होता है, इसलिए कई बार ऐसे फीचर्स या एक्सेसरीज भी सुझाई जाती हैं जिनकी वास्तव में जरूरत नहीं होती. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कार चुनने से पहले अलग-अलग मॉडल की तुलना करें, ऑनलाइन रिव्यू पढ़ें और अपनी जरूरतों की सूची तैयार करें. 

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कई खरीदार सिर्फ कार की लुक्स देखकर फैसला कर लेते हैं, जबकि उन्हें सुरक्षा फीचर्स, सीटिंग स्पेस और भविष्य के खर्चों पर भी ध्यान देना चाहिए. इसके अलावा अलग-अलग डीलरशिप से कोटेशन लेने पर बेहतर कीमत और अतिरिक्त लाभ भी मिल सकते हैं. कार खरीदने का फैसला भावनाओं से नहीं बल्कि सही जानकारी के आधार पर लेना चाहिए.

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टेस्ट ड्राइव और फाइनल जांच को कभी न करें नजरअंदाज

कई लोग कार को देखकर ही प्रभावित हो जाते हैं और टेस्ट ड्राइव को औपचारिकता समझते हैं. यही गलती आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकती है. टेस्ट ड्राइव के दौरान कार की विजिबिलिटी, स्टीयरिंग रिस्पॉन्स, ब्रेकिंग, सस्पेंशन और ड्राइविंग कम्फर्ट को अच्छी तरह जांचना चाहिए. इसके साथ ही डिलीवरी से पहले प्री डिलीवरी इंस्पेक्शन यानी पीडीआई करना भी बेहद जरूरी माना जाता है. 

ऑटो कम्युनिटी में कई खरीदारों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया है कि जल्दबाजी में पीडीआई करने से बाद में स्क्रैच, इलेक्ट्रिकल दिक्कत या अन्य खामियां सामने आईं. इसके अलावा कीमत तय करते समय सिर्फ एक्स शोरूम प्राइस नहीं बल्कि इंश्योरेंस, रजिस्ट्रेशन, एक्सेसरीज और मेंटेनेंस खर्च को भी ध्यान में रखना चाहिए. सही जांच और धैर्य के साथ लिया गया फैसला आपको बेहतर डील दिला सकता है और भविष्य की परेशानियों से भी बचा सकता है.

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