Car Blind Spot: सड़क पर सुरक्षित ड्राइविंग केवल अच्छी कार या तेज रिफ्लेक्स का मामला नहीं है. कई बार दुर्घटनाएं उन चीजों की वजह से होती हैं जो चालक को दिखाई ही नहीं देतीं. ऐसी ही एक बड़ी समस्या है कार का ब्लाइंड स्पॉट. यह वाहन के आसपास का वह हिस्सा होता है जो रियर व्यू मिरर और साइड मिरर में साफ दिखाई नहीं देता. यही वजह है कि कई बार लेन बदलते समय, ओवरटेक करते समय या मोड़ लेते समय चालक को दूसरे वाहन, बाइक या साइकिल सवार नजर नहीं आते. 

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विशेषज्ञों के अनुसार सड़क हादसों का एक बड़ा कारण Blind Spot को नजरअंदाज करना भी है. आधुनिक कारों में कई सुरक्षा तकनीकें दी जा रही हैं, लेकिन फिर भी चालक की सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण रहती है. अगर आप रोजाना ड्राइव करते हैं, तो ब्लाइंड स्पॉट के बारे में सही जानकारी होना आपकी और दूसरों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. छोटी सी सावधानी बड़े हादसे को टाल सकती है.

आखिर क्या होता है ब्लाइंड स्पॉट?

हर कार में कुछ ऐसे क्षेत्र होते हैं जो चालक की सीधी नजर और मिरर की पहुंच से बाहर रहते हैं. इन्हें ही ब्लाइंड स्पॉट कहा जाता है. आमतौर पर यह हिस्सा कार के दोनों किनारों और पीछे के आसपास होता है. जब कोई बाइक, कार या अन्य वाहन इस क्षेत्र में आ जाता है, तो वह चालक को दिखाई नहीं देता. यही स्थिति सबसे ज्यादा जोखिम पैदा करती है. मान लीजिए आप लेन बदलने जा रहे हैं और उसी समय कोई बाइक आपके ब्लाइंड स्पॉट में मौजूद है, तो टक्कर की संभावना बढ़ सकती है. 

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हाईवे पर यह खतरा और ज्यादा गंभीर हो जाता है क्योंकि वहां वाहन तेज गति से चलते हैं. इसलिए केवल मिरर देखकर फैसला लेना हमेशा पर्याप्त नहीं माना जाता. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लेन बदलने से पहले मिरर देखने के साथ हल्का कंधा घुमाकर आसपास की स्थिति भी जरूर जांचनी चाहिए.

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ब्लाइंड स्पॉट  से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

ब्लाइंड स्पॉट को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है. सबसे पहले अपने साइड मिरर को सही तरीके से सेट करें ताकि ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र दिखाई दे. कई चालक मिरर को गलत एंगल पर रखते हैं, जिससे ब्लाइंड स्पॉट का दायरा बढ़ जाता है. इसके अलावा लेन बदलने से पहले हमेशा इंडिकेटर दें और आसपास के ट्रैफिक को ध्यान से देखें. 

नई कारों में Blind Spot Monitoring जैसी तकनीक भी मिलने लगी है, जो चालक को संभावित खतरे की चेतावनी देती है. हालांकि तकनीक पर पूरी तरह निर्भर रहना सही नहीं माना जाता. सड़क पर सतर्क रहना और नियमित रूप से मिरर जांचना सबसे जरूरी आदत है. विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षित ड्राइविंग का मतलब केवल आगे देखना नहीं, बल्कि वाहन के चारों ओर की स्थिति को समझना भी है. यही जागरूकता सड़क पर आपकी सुरक्षा को कई गुना बढ़ा सकती है.

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