Car Chassis Number Fraud: भारतीय समाज में जिसके पास खुद की गाड़ी है उसको अपने आस-पड़ोस में काफी इज्जत मिलती है. जिसके चलते जो लोग नई गाड़ी नहीं खरीद पाते हैं वह मार्केट से सेकंड हैंड कार ही खरीद लेते हैं. ताकि समाज में वह भी अपनी कार को फ्लेक्स कर सकें. सेकंड हैंड कार खरीदते समय लोग कम प्राइस और कार की चमक-धमक देखते हैं. लेकिन आपको बता दें कि, जिस गाड़ी को आप सेकंड हैंड समझ कर खरीद रहे हैं वह गाड़ी चोरी की भी हो सकती है.
आजकल सेकंड हैंड गाड़ियों का मार्केट बहुत बड़ा हो चुका है. लेकिन इसी चमक-दमक के पीछे एक काला सच भी छिपा है. अक्सर वाहन चोरों का शातिर गिरोह चोरी की गाड़ियों को अच्छे दाम में बेचने के लिए गाड़ी के चेसिस नंबर को बदल देते हैं. तो चलिए जानतें हैं कि, इस बड़े फर्जीवाड़े को पुलिस कैसे पकड़ती है और वाहन पोर्टल कैसे खोलता है पोल इस साजिश का पोल.
चोरों का शातिर तरीका
बता दें कि, मार्केट या किसी के घर से गाड़ी चुराने के बाद चोरों का गिरोह सबसे पहले उसके नंबर प्लेट को बदलता है. ताकि पुलिस या सड़क पर लगे डिजिटल कैमरे उसे ट्रैक न कर सकें. इसके बाद असली खेल शुरू होता है कार की बॉडी पर बने 17 अंकों के यूनिक चेसिस नंबर को बदलने का. जानकारी के लिए आपको बता दें कि, चोर अक्सर दुर्घटनाग्रस्त या कबाड़ हो चुकी पुरानी गाड़ियों का चेसिस नंबर और कागजात बहुत कम कीमत पर खरीद लेते हैं.
इसके बाद वे चोरी की गई कार के असली चेसिस नंबर को घिसकर या वेल्डिंग के जरिए मिटा देते हैं और उस जगह पर पुरानी गाड़ी का नंबर पंच कर देते हैं. इस पूरी प्रक्रिया को कार क्लोनिंग कहा जाता है, जिससे चोरी की गाड़ी बिल्कुल वैध दिखने लगती है और इन गाड़ियों को मार्केट में सेकंड हैंड कार के तौर पर अच्छा प्राइस भी मिल जाता है.
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वाहन पोर्टल से खुलता है राज
चोर भले ही चोरी की गई गाड़ी के चेसिस नंबर बदल लें लेकिन सरकार के केंद्रीय डिजिटल सिस्टम को चकमा नहीं दे सकते. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का वाहन पोर्टल आज के समय में बेहद स्मार्ट हो चुका है. जब कोई कार के चेसिस और गाड़ी के नंबर को इस ऑनलाइन डेटाबेस पर चेक करता है.
तो तुरंत सच सामने आ जाता है. अगर चोरों ने नंबर बदल भी दिया तो वाहन पोर्टल पर दर्ज गाड़ी के रंग, मैन्युफैक्चरिंग साल, इंजन मॉडल और पिछली इंश्योरेंस हिस्ट्री से मौजूदा गाड़ी का मिलान नहीं हो पाता. यह मिसमैच ही चोरों की पोल खोलने का सबसे पहला जरिया बनता है. तो आप भी अगर सेकंड हैंड गाड़ी खरीद रहें हैं तो इस पोर्टल के जरिये कार की हिस्ट्री जरूर चेक करें.
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